संजय तिवारी
रामदेव का राजनीतिक रंग
अब बाबा रामदेव अपने असली रंग में दिख रहे हैं. बात करते हैं तो बार बार उत्साह को बनाये रखने की सलाह देते हैं. जयपुर, दिल्ली और जोधपुर में तीन सभाओं के दौरान उन्होंने कमोबेश एक बात ही कही कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन को आगे बढ़ाना है और "चोर" "लुटेरे" "डाकुओं" से देश को मुक्त कराना है. यह विशेषण बाबा रामदेव किसके लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. ये चोर लुटेरे और डाकू कोई और नहीं बल्कि इस देश के वही नेता हैं जिन्हें अपने योग शिविरों में बुलाकर रामदेव अपना कद बढ़ाते रहे हैं.
टीम गडकरी घोषित, खबर देनेवाले अब बाइट देंगे
आठ बार लिस्ट फाड़ने के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने हि्न्दू नववर्ष के दिन लिटिल गडकरी की जंबो टीम घोषित कर दी. टीम कुछ ऐसी बनी है कि आश्चर्य से दांतो तले अंगुली दबा लेने का मन करेगा. कल तक भाजपा के जो नेता आफलाइन ब्रीफिंग को अपना राजनीतिक कौशल समझते थे उन्हें प्रवक्ता की जिम्मेदारी दे दी गयी है....पाठशाला में राजनीति की पढ़ाई
रविवार को दिल्ली में गोविन्दाचार्य के घर पर पूर्व नियत समय के अनुसार 19 छात्र, एक शिक्षक और तीन सहयोगी उनसे मिलने के लिए आये थे. ये कोई सामान्य छात्र नहीं थे. ये राजनीति के छात्र थे. राजनीति के ऐसे छात्र जो पाठशाला में राजनीति और समाजसेवा की पढ़ाई पढ़ रहे हैं. कंपनीराज के तहत विकास का पाठ पढ़ रहे भारत के ऐसे नौजवान छात्र जो छात्र राजनीति करके राजनीति की पढाई नहीं पढ़ते बल्कि सीधे किताब ही राजनीति की पढ़ते हैं और परीक्षा भी उसी की देते हैं. ...अफगानिस्तान में तालिबान के सामने नतमस्तक
अगर यह अफवाह नहीं है तो यह बुरी खबर है. पता नहीं अफगानिस्तान भारत संबंधों के विशेषज्ञ और रणनीतिकार इसे कैसे देखेंगे और परिभाषित करेंगे लेकिन भारत सरकार के खुफिया सूत्रों द्वारा खबर मीडिया में लीक की जा रही है कि भारत सरकार अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण विकास कार्यों में कमी लायेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बीते महीने की 27 तारीख को काबुल दूतावास के पास एक विस्फोट हुआ जिसमें नौ भारतीय मारे गये थे....शब्दों की चौकीदारी संभव नहीं-अनुपम मिश्र
अनुपम मिश्र पानी और पर्यावरण पर काम करने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के साथ उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया जिसका दूरगामी दृष्टि दिखती है. उन्होंने अपनी किताब पर किसी तरह का कापीराईट नहीं रखा. इस किताब की अब तक एक लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं. मीडिया वर्तमान स्वरूप और कापीराईट के सवाल पर हमने विस्तृत बात की. यहां प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-...आंदोलन हो तो ऑनलाइन हो
गोपाल कृष्ण दिल्ली की एक संस्था टाक्सिक्स लिंक में काम करते थे. टाक्सिक्स लिंक जहरीले रसायनों पर काम करती है और उनके खिलाफ आंदोलन चलाती है. काम का तरीका एनजीओवादी है. इसलिए यहां काम करनेवाले लोग जमीन से ज्यादा कम्प्यूटर से जुड़े रहते हैं. गोपाल भी बाहर मैदान से ज्यादा बेसमेन्ट में अपने कम्प्यूटर पर सक्रिय रहते थे. तब आनलाइन दुनिया की अपनी कोई खास समझ नहीं थी. ...दफन हो गया प्रमोद महाजन हत्याकाण्ड का रहस्य
प्रवीण महाजन की मौत हो गयी. 12 दिसंबर 2009 को उन्हें ठाणे के ज्युपिटर अस्पताल में ब्रेन हैमरेज के बाद दाखिल करवाया गया था. जब उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ तो प्रवीण महाजन पेरोल पर जेल से बाहर अपने परिवार वालों से मिलने के लिए आये थे. जिस दिन उन्हें वापस जेल जाना था उसके कुछ घण्टे पहले ही उन्हें ब्रेन हैमरेज का अटैक हुआ और उन्हें ज्युपिटर अस्पताल में भर्ती करवाया गया. प्रवीण महाजन की मौत सामान्य मौत नहीं है. उनकी मौत से उन कारणों की भी मौत हो गयी जिसके चलते उन्होंने प्रमोद महाजन की हत्या की थी....भविष्य के भारत की ओर पहला बजट
वित्त वर्ष 2010-11 बजट प्रस्तुत होने से पहले आम आदमी की परिभाषा दाल रोटी से जोड़ी जा रही थी. लेकिन बजट आया तो आम आदमी की जगह शहर के वे लोग आ गये जो एक घर और गाड़ी का सपना देखते हैं. अपने बजटीय प्रावधान में प्रणव मुखर्जी ने जो घोषणाएं की हैं वह उस आम आदमी को सचमुच राहत देनेवाली हैं जिनका रोना अब तक विपक्षी दल और मीडिया का एक हिस्सा रो रहा था. फिर अचानक ही प्रणव मुखर्जी का बजट आम आदमी का विरोधी कैसे हो गया?...दरवेशी में बीते दो साल
आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि हालात जैसे थे वैसे ही हैं. 25 फरवरी 2008 से लेकर आज 25 फरवरी 2010 तक हालात बदस्तूर हैं. न बाहर की दुनिया के रुख में कोई बदलाव आया है और न अपनी परिस्थितियों में. हां, अब दिमाग उस समग्रता में विषय वस्तु को पकड़ने से मना कर देता है जैसे दो साल पहले पकड़ लेता है. लेकिन इसमें दिमाग का भी कोई दोष नहीं है....रेल बजट में कैसे समाये देश?
64 हजार किलोमीटर से अधिक का रेल नेटवर्क और प्रतिदिन 17 हजार ट्रेनों के द्वारा हर साल करीब छह अरब लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचानेवाली भारतीय रेलवे आखिरकार क्या है? एक परिवहन सेवा प्रदाता कंपनी या फिर एक सरकारी मंत्रालय? आप भी यही कहेंगे कि यह एक रेल सेवा प्रदाता संस्थान है जो भारत सरकार में एक मंत्रालय के रूप में काम करता है. क्योंकि यह सबसे बड़ा मंत्रालय है इसलिए सिर्फ रेलमंत्री को ही यह अधिकार प्राप्त है कि वह अपना बजट अलग से प्रस्तुत करे. ...Author info
