सरिता अरगरे
टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी
वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।
माखनलाल कैंपस में महाभारत
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय एक मर्तबा फ़िर विवादों में है। अपने स्थापना से लेकर अब तक पत्रकारिता का यह तीर्थस्थल किसी ना किसी वजह से खबरों में रहा है। अपनी साख के संकट से जूझ रही यूनिवर्सिटी के कुलपति बी. के. कुठियाला की कार्यशैली ताज़ा असंतोष की वजह बन गई है। कुरुक्षेत्र से आए प्रोफ़ेसर कुठियाला के फ़ैसलों से पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कैंपस में "महाभारत" छिड़ गई है। असंतुष्ट खेमा कुलपति के खिलाफ़ मोर्चा खोल चुका है। सूचना के अधिकार के तहत हासिल जानकारियों ने आग में घी का काम किया है।...खड्डे में जाए जनता, हवा में उड़ेगी सरकार
मध्यप्रदेश सरकार के फ़ैसलों को देखकर "अँधी पीसे - कुत्ते खाएँ" कहावत चरितार्थ होती दिखाई देती है। सत्ता के नशे में डूबी भाजपा को विपक्ष की निष्क्रियता ने निरंकुशता के पंख लगाकर भ्रष्टाचार के आसमान में लम्बी और ऊँची उड़ान भरने के लिये स्वतंत्र छोड़ दिया है। राज्य में राजधानी भोपाल की सड़कों से लेकर राजमार्गों तक की जर्जर हालत से लोगों का ध्यान हटाने के लिये अब हवाई सफ़र का सपना बेचा जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने निजी क्षेत्र के आपरेटर्स के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख शहरों को वायुसेवा से जोड़ने का निर्णय लिया है।...भूमाफियाओं की गिरफ्त में भाजपा सरकार
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सनसनीखेज़ और उत्तेजक बयानों ने प्रदेश की राजनीति में तूफ़ान ला दिया है। जहाँ शिवपुरी में भूमाफ़ियाओं पर उन्हें हटाने के लिये धन इकट्ठा करने का बयान दे कर सबको हक्का बक्का कर दिया, वहीं सदन के भीतर भूमाफ़ियाओं को चुनौती देने की शिवराज की दंभ भरी हुँकार से लोग सन्न हैं। विरोधियों को चुनौती देने के लिये उन्होंने संसदीय मर्यादाओं को बलाये ताक रखकर जिस भाषा शैली का इस्तेमाल किया, उसका उदाहरण प्रदेश के इतिहास में शायद ही मिले। मुख्यमंत्री भूमाफ़ियाओं पर उन्हें हटाने के लिये धन इकट्ठा करने का आरोप लगा रहे हैं, मगर भाजपा सरकार की कामकाज की शैली पर नज़र डालें, तो राज्य सरकार खुद ही भूमाफ़िया की सरमायेदार नज़र आती है।...लोकतंत्र के असली लुटेरे
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन आईएएस अफसरों सहित कई अन्य सरकारी मुलाज़िमों के ठिकानों पर इन्कम टैक्स के छापों में अब तक करीब 500 करोड़ की बेनामी संपत्ति का पता चला है। इसमें 7.7 करोड़ की नकदी और ज़ेवरात भी शामिल है। कुबेर का खज़ाना साबित हो रहीं इन अफ़सरों की तिजोरियाँ महज़ एक बानगी हैं ।...राहुल गांधी आये, विवाद पीछे छोड़ गये
राहुल गांधी का मध्य प्रदेश में दो दिन के दौरे के बाद जो विवाद खड़ा हुआ था वह रुकने का नाम नहीं ले रहा है. राहुल गांधी तो अपना दौरा पूरा करके वापस चले गये लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों एक दूसरे से उलझ पड़े हैं. ...संत आसाराम की सेवा में जुटी है मध्य प्रदेश सरकार
भोपाल। आसाराम को लेकर भाजपा में ही अजीब सी असमंजस की स्थिति बन गयी है. जहां एक ओर विश्व हिन्दू परिषद भाजपा पर लगातार दबाव बना रहा है कि संत आसाराम को परेशान न किया जाए वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश और गुजरात की सरकारों का रुख आसाराम को लेकर अलग अलग है. ...चीं भाजपा का ई आंदोलन
भारतीय संस्कृति और परंपराओं की दुहाई देने वाली पार्टी अब आधुनिक तकनीक का दामन थाम सत्ता शीर्ष तक पहुँचने की जुगत में लगी हुई है । इंडिया शाइनिंग और इंटरनेट के ज़रिये मतदाताओं को रिझाने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बावजूद बीजेपी का अब भी संचार के तेज़ी से उभरते नये माध्यम से मोहभंग नहीं हुआ है।...कमल का चला जोर, हाथ हुआ कमजोर
मध्यप्रदेश में हुए नगरीय निकाय चुनावों के पहले चरण में भाजपा ने एक बार फिर बाजी मार ली है। पहले दौर में 12 नगर निगमों में से सात में महापौर पद पर भाजपा का कब्जा हो गया है। सूबे के चार बड़े शहरों की नगर निगम अब बीजेपी के खाते में हैं।...भोपाल की नसों में आज भी रिस रही है त्रासदी
दुनिया की सबसे बड़ी औद्यौगिक त्रासदी "भोपाल गैस कांड" का जहर चौथाई सदी बीतने के बावजूद आज भी शहर की नसों में घुला हुआ है। 2-3 दिसम्बर 1984 की रात हजारों जिंदगियाँ लील चुके यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास के इलाकों की मिट्टी और पानी में अब भी भारी मात्रा में जहर मौजूद है। विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (सीएसई) के अध्ययन के अनुसार फैक्ट्री से तीन किलोमीटर दूर तक के इलाके के भू-जल में भारतीय मानकों से 40 गुना अधिक तक कीटनाशक पाए गए हैं।...Author info
