परमहंस सत्यानंद
भाषा और धर्म
संस्कृत के मामले में मैं बहुत बड़ा आलोचक हूं. मुझे 'श' या 'स' में अंतर या फर्क मालूम पड़ता है. संस्कृत में मैंने काफी अध्ययन किया है. फिर अपनी भाषा भी संस्कृत है. अंग्रेजी मैं बोलता हूं तो गलती करता हूं, लेकिन संस्कृत बोलूंगा तो गलती नहीं करूंगा. मगर संस्कृत कोई सुनता ही नहीं है. फिर भी इस भाषा का उदय होगा. अभी नहीं. यह जो कम्प्यूटर युग आ रहा है उसमें अभी जिस भाषा का उपयोग कर रहे हैं वह नकारात्मक है, अगर सकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी बहुत सी अड़चने दूर हो जाएंगी.
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