राष्ट्रगान
जन गण मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशिष मागे
गाहे तव जय गाथा
जन गण मंगल दायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे जय हे जय हे
जय जय जय जय हे
एक सवाल?
1. जन गण मन का भाग्यविधाता कौन है?
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जार्ज पंचम है, जिसके आने पर ये कवित लिखी गई थी.
राष्ट्रगान में अधिनायक कौन था सवाल यह नहीं. आज कौन है, यह जानना ज्यादा जरूरी है. आज का अधिनायक बाजार है. बाजार ही भाग्यविधाता है, बाजार से ही आशिर्वाद मांगा जाता है. बाजारवालों की ही जयगाथा है और जनगण का मंगलदायक बाजार ही रह गया है. ये कैसी आजादी जब वंदेमातरम गाने का अधिकार भी ए आर रहमान के पास चला गया है.
हमें याद करना होगा विस्मिल जी की वो गजल-
वतन की आबरू का पास देखें
कौन रखता है
सुना है आज मक्कल में
हमारा इम्तिहां होगा
जुदा मत हो मेरे पहलू से
ऐ दर्दे वतन हर्गिज
ना जाने बादे मुर्दन
मैं कहां और तू कहां होगा.
इलाही वह भी दिन होगा
जब अपना राज देखेंगे
जब अपनी ही जमी होंगी
अपना आसमा होंगा.
शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले
वतन में मिटनेवालों का यही बाकी निशां होगा…
ऐसे ही कुछ सवाल मेरे मन में भी एक बार उठे थे और मैंने एक पोस्ट भी इसपर लिखी थी – ये ‘भारत भाग्य विधाता’ कौन है भाई?
माना कि गुलामी के दिनो में राजभक्ति प्रदर्शन जरूरी थी जिसके कारण जार्ज पंचम के भारत आगमन पर उसके स्वागत में इस कविता को रवीन्द्र नाथ टैगोर ने रचा और गाया भी। किन्तु स्वतन्त्र भारत में इसे राष्ट्रगान के रूप में चुनने की क्या मजबूरी रही होगी? ये तो शायद ‘वीर’ जवाहर को ही पता हो!
कौन है ये भारत भाग्य विधाता? इसका जवाब मैंने भी तलाशने की कोशिश की थी। शायद ये लेख काम का हो…
http://diaryofanindian.blogspot.com/2007/04/blog-post_12.html
बड़े-बूड़े तो यही बताते हैं कि गीत हमारे भाग्यविधाता अंग्रेज राजा के लिए ही लिखा गया था। लेकिन जिस मर्जी के लिए लिखा गया हो, अब यह हमारा राष्ट्रगान है और हमें इसका सम्मान करना ही चाहिए।
अनिल जी के चिट्ठे पर निम्न जानकारी थी:
“टैगोर ने सफाई दी कि जॉर्ज पंचम की सेवा में लगे एक अधिकारी (जो गुरु टैगोर का मित्र भी था) ने उनसे इस तरह का स्वागत गीत लिखने को कहा था, लेकिन उनके लिखे गीत में भाग्य विधाता का अर्थ ईश्वर से है जो भारत के सामूहिक मानस का अधिनायक है और कोई भी जॉर्ज पंचम या षष्टम उसकी जगह नहीं ले सकता।”
यानि सच यही है कि गीत अंग्रेज राजा के लिए ही लिखा गया था, बाद में सफाई देकर लीपापोती की गई। वैसे भी पुराने समय में कांग्रेस अंग्रेज भक्त ही हुआ करती थी।
इस विषय में प्रतीक पाण्डे जी से सहमत हूँ:
“राष्ट्रगान तो किसी ऐसे गीत को होना चाहिये; जिसे सुनकर देशप्रेम की भावना उद्दीप्त हो और भारतीय होने के गौरव की अनुभूति से धमनियों व शिराओं में रक्त-संचार तेज़ हो जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये ‘वन्दे मातरम्’ या ‘सारे जहां से अच्छा’ जैसा कोई गीत ही राष्ट्रगान के तौर पर ज़्यादा कारगर साबित होगा।”
यह अब किसी शोध का विषय नही है की राष्ट्र गान का भाग्य विधाता कौन है .और लिखते लिखाते समय इसका इशारा किसकी ओर था . राष्ट्र गान का भाग्य विधाता मेरी छोटी समझ से तो सिर्फ ओर सिर्फ आज की तारीख में राष्ट्र ध्वज है जिसके आगे समूचा राष्ट्र नतमस्तक है ………
Why this song was made national anthom is a mistry. We pray every thing which has been left by english people. These black english people were more dangerous for our culture and country.