यह बेतुका है कि मैंने हिन्दी में गधा खोजा ही क्यों? चलो खोजा किसी कारण से लेकिन परिणाम बड़े आश्चर्यजनक आये. इस खोज में कई ब्लागरों के चित्र सामने आ गये. गधा चित्र खोज के परिणाम देखिए……
1. अशोक चक्रधर
2. ज्ञानदत्त पाण्डेय
3. मसिजीवी
4. नीरज दीवान
5. समीर लाल
6. शास्त्री जेसी फिलीप
7. महाशक्ति
8. रवि रतलामी
9. आर सी मिश्रा
10. जोगलिखी संजय पटेल की
11. ईपंडित उर्फ श्रीश
12. काकेश का चिट्ठा
और कुछ ऐसे ब्लागरों के चित्र जिनके चेहरे तो पहचान में आ रहे हैं लेकिन नाम तुरंत ध्यान में नहीं आ रहा है. सवाल है ऐसा क्या है जो गधा शब्द से इन महानुभावों के चित्र जुड़ गये? यह तकनीकि का मजाक है या……………………….. वैसे चिंता करने की बात ज्यादा नहीं है, इस छवि खोज में भगवान कृष्ण, पोप जान पाल द्वितीय और सचिन तेंदुलकर का भी चित्र सामने आता है.
Possibly Related Posts:
- भाजपा नेताओं का मक्काः झंडेवालान
- पीने का पानी
- फिर अविनाश डाल पर
- अभिव्यक्ति की चरम अवस्था
- विस्फोट.कॉम को चाहिए निहंग पत्रकार
मुझे नहीं पता था कि गूगल इतने अंदर तक जासूसी कर ले जाता है। सात परदों मे छिपे सच को पकड़ लेता है, चेहरों से ढंके चेहरे को पकड़ लेता है। धन्य है गूगल खोज और सार्थक है आपकी कोशिश…
वैधानिक चेतावनी – मेरी टिप्पणी को कोई ब्लॉगर मित्र सीरियसली न लें।
ओह, तो आपने ये बात जगजाहिर कर ही दी!
और, अनिल जी, आपकी बात तो सोलह आने सच है – मेन, बेसिकली इज ए पिग इन ए डिस्गाइज़.
और, कभी कभी वो गधे का रूप भी धर लेता है.
मैं तो डरते डरते देखने आया था की सूची में अपना नाम पहले नम्बर पर तो नहीं. मगर देख कर राहत मिली की तकनीक चाहे कितनी ही विकसीत हो जाये पूर्ण नहीं होती.
http://www.google.com/search?sourceid=navclient&ie=UTF-8&rlz=1T4GFRC_en___IN206&q=%e0%a4%97%e0%a4%a7%e0%a4%be
समीरजी का नाम देखकर बडी राहत सी महसूस हो रही है. वो कहीं छूट जाते हैं तो अच्छा नही लगता. मैं चाहे हुँ ना ना हुँ, उनके साथ नाइंसाफी नही होनी चाहिए.
अपना नाम ना देख मायूसी हुई. फिर सर्च किया तो पता चला कि अपना चिट्ठा तो वहां आया ही है. हम ना सही हमारा चिट्ठा ही सही.
संजय जी व पंकज जी चिन्ता न करें, तरकश वहाँ आ रहा है।
वाह, एक से एक महारथी हैं. शुक्र है कि मेरा नाम छूट नही गया — शास्त्री जे सी फिलिप
मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!
कृष्ण चंदर का नाम तो आया ही नहीं. बाकी आ कर क्या करेंगे?
भई इस क्रम को भी तो व्याख्यायित करें-
हम ऊपर हैं तो बड़े गधे हैं कि छोटे-
वैसे समीरजी ने ‘आप बड़े गदहा लेखक हैं’ वाली पोस्ट में इसका कारणोल्लेख कर दिया था।
हम खुश हैं कि हम हैं
बहुत बुरी बात है, हमें इस लायक भी नहीं समझा गया।
अगले पन्ने पर नीरज दीवान और श्रीश भी है।
बहुत नाइन्साफ़ी है, हम कंही नही है।
इस लेख की बदौलत आप भी गूगल के गधा सर्च में जुड़ गये! अभी तो टेक्स्ट सर्च में नाम आ रहा है. देर नहीं; चेहरा भी जुड़ जायेगा!
चलिये हमारा नाम है। वैसे यह तो ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत के आने के बाद हुआ है। एक बार मैने भी अरूण जी के लेख के लिये गधा खोजते हुए समीर जी को ही पाया था वाकि सब नदारत थे।
अरे वाह, हमारे तो नाम के साथ साथ वो उपर वाली फोटो भी आ रही है. फिर तो मेरी ही होगी, गुगल झूठ थोड़े ही बोलेगा. वैसे आप गधा शब्द सर्च क्यूँ कर रहे थे?
अरे वाह हम तो बच गये, अभी माताजी को फ़ोन करके कहता हूँ कि अब तो मुझे गधा कहना बन्द करें ।
लो कल्लो बात, ये गूगल देव ने तो सबसे बड़े गधे अर्थात हमें सर्च लिस्ट मे शामिल ही नही किया!! अब तो हमें अपने गधेपन पे शक होने लगा!!
क्या खूब सर्च किए हो भैया!!
हा हा.. मज़ेदार. ये भी खूब रही. गधा टाइप किया था गद्य ? गद्य लेखक वैसे गदहा लेखक ही होते हैं.
मस्त चुटकी ली भैया.
कुछ गड़बडी़ है भाई, हम न सही हमारे ब्लाग पर डाली गयी तसवीर भी उस सर्च में है. फिर हमें क्यों गधा नहीं माना गया?
यह नाइंसाफ़ी ठीक नहीं.
मैने अपना फोटो भी गूगल गधा ईंडेक्स मे डाल लीया है।
यह भी खूब रही!