उमर शरीफ के बारे में मैं यहां क्यों लिख रहा हूं? सच बताऊं तो मैं भी नहीं जानता. लेकिन उमर शरीफ के प्रति बचपन से मेरे मन में एक आकर्षण है. पहली बार 10-11 साल की उम्र में मैंने उनका एक नाटक वीसीआर पर देखा था-बकरा किश्तों पर. शायद यही वह नाटक था जिसने उमर शरीफ को सबसे अधिक शोहरत दी. उस समय से ही मैं उमर शरीफ के स्टेज शो का मैं प्रशंसक हूं. इस दौर में जबकि कृतिम साधनों से झूठे अभिनय का सहारा लेकर कला को परिभाषित किया जाता है उमर शरीफ स्टेज शो के जरिए ज्यादा जीवंत मनोरंजन को बढ़ावा दे रहे हैं. उनके द्वारा खड़े किये गये कई कलाकार लाफ्टर चैलेंज में आकर काफी नाम कमा चुके हैं. खुद उमर शरीफ भी लाफ्टर चैलेंज में आये थे. वहां उन्होंने अपने बारे में जो कुछ कहा उससे साबित हो गया कि महान लोग बहुत सीधे-सादे तरीके से हमारे बीच में होते हैं इस होश के साथ किः
मैं तो बस राजदार था उसका वरना तो सारे राज उसके थे
वो दरिया में प्यासा बैठा था जबकि समंदर तमाम उसके थे
वो धूप में बैठा है छांव देने को जबकि दरख्त सारे सायादार उसके थे
यूं तो बज़ाहिर लोगों में मैंने रिज्ग बांटा था, लेकिन दरपर्दा सारे हाथ उसके थे
मैंने कमाल बुलंदी पर जाकर सोचा उमर, ये तो सारे कमाल उसके थे.
उमर शरीफ पर एक लेख अंग्रेजी में
उमर शरीफ का एक विडियो
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