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10 जनवरी ईस्वीपूर्व 5114 को जन्मे थे राम

Posted by संजय तिवारी on Dec 2nd, 2007 and filed under बात करामात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

सवाल राम के होने न होने का नहीं है, सवाल है कि हम खुद ही किन आधारों और तर्कों पर अपने इतिहास को मिथक मान बैठे हैं? क्यों हमें अपना इतिहास मिथक लगता है? क्यों हमें अपना विज्ञान कर्मकाण्ड और पोंगापंथ समझ में आता है? मुझे नहीं मालूम आप लोगों में से कितनों ने भागवत महापुराण पढ़ा है. आप पढ़िये आपको अंदाज लगेगा कि वह शुद्धरूप से हमारा इतिहास है. फर्क सिर्फ इतना है कि इतिहास को जानने का तरीका वैसा नहीं है जैसा हम लोग आजकल प्रयोग करते हैं. हमारा इतिहास हमारे घरों में है, और हम उसे बड़ी श्रद्धा के साथ पढ़ते हैं. हम इतिहास पढ़कर डिग्री की होड़ में नहीं पड़ते. (भारत की इतिहास दृष्टि को समझने के लिए धर्मपाल को विस्तार से पढ़ना चाहिए.)

इसलिए पुष्कर भटनागर की खोज को समझने के लिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम मिथक वाली मानसिकता से मुक्त होकर इस पूरे प्रकरण को देखें. राम की कहानी प्रथम बार महर्षि वाल्मीकि ने लिखी थी। वाल्मीकि रामायण राम के अयोध्या में सिंहासनारूढ़ होने के बाद लिखी गई। पुष्कर भटनागर ने अपनी खोज-बीन में ऐसे तथ्य सामने रखें हैं कि लगता है महर्षि वाल्मीकि एक महान खगोलविद् थे। उन्होंने राम के जीवन में घटित घटनाओं से संबंधित तत्कालीन ग्रह, नक्षत्र और राशियों की स्थिति का वर्णन किया है। इन खगोलीय स्थितियों की वास्तविक तिथियां ‘प्लैनेटेरियम साफ्टवेयर’ के माध्यम से जानी जा सकती है। भारतीय राजस्व सेवा में कार्यरत पुष्कर भटनागर ने अमेरिका से ‘प्लैनेटेरियम गोल्ड’ नामक साफ्टवेयर प्राप्त किया, जिससे सूर्य/ चंद्रमा के ग्रहण की तिथियां तथा अन्य ग्रहों की स्थिति तथा पृथ्वी से उनकी दूरी वैज्ञानिक तथा खगोलीय पद्धति से जानी जा सकती है। इसके द्वारा उन्होंने महर्षि वाल्मीकि द्वारा वर्णित खगोलीय स्थितियों के आधार पर आधुनिक अंग्रेजी कैलेण्डर की तारीखें निकाली है। इस प्रकार उन्होंने श्रीराम के जन्म से लेकर 14 वर्ष के वनवास के बाद वापस अयोध्या पहुंचने तक की घटनाओं की तिथियों का पता लगाया है। इन सबका अत्यंत रोचक एवं विश्वसनीय वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक ‘डेटिंग द एरा ऑफ लार्ड राम’ (Dating the era of Lord Ram) में किया है। इसमें से कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण यहां भी प्रस्तुत किए जा रहे है।

राम की जन्म तिथि
महर्षि वाल्मीकि ने बालकाण्ड के सर्ग 18 के श्लोक 8 और 9 में वर्णन किया है कि श्रीराम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ। उस समय सूर्य,मंगल,गुरु,शनि व शुक्र ये पांच ग्रह उच्च स्थान में विद्यमान थे तथा लग्न में चंद्रमा के साथ बृहस्पति विराजमान थे। ग्रहों,नक्षत्रों तथा राशियों की स्थिति इस प्रकार थी-सूर्य मेष में,मंगल मकर में,बृहस्पति कर्क में, शनि तुला में और शुक्र मीन में थे। चैत्र माह में शुक्ल पक्ष नवमी की दोपहर 12 बजे का समय था। जब उपर्युक्त खगोलीय स्थिति को कंप्यूटर में डाला गया तो ‘प्लैनेटेरियम गोल्ड साफ्टवेयर’ के माध्यम से यह निर्धारित किया गया कि 10 जनवरी, 5114 ई.पू. दोपहर के समय अयोध्या के लेटीच्यूड तथा लांगीच्यूड से ग्रहों, नक्षत्रों तथा राशियों की स्थिति बिल्कुल वही थी, जो महर्षि वाल्मीकि ने वर्णित की है। इस प्रकार श्रीराम का जन्म 10 जनवरी सन् 5114 ई. पू.(7117 वर्ष पूर्व) को हुआ जो भारतीय कैलेण्डर के अनुसा

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