धड़ा-धड़ कई स्रोतों से पता चल गया है कि दिल्ली के एक फार्महाउस में 12 जनवरी को ब्लागर मीट आयोजित हो रही है. जितना देख-सुन रहा हूं उससे यही लगता है कि यह अब तक के ब्लागर मीट्स का का बाप साबित होगा. आयोजक कह रहे हैं कि 200-300 ब्लागर आयेंगे. कहां से मालूम नहीं. कार्यक्रम की रूपरेखा पर जरा गौर फरमाईये-
12:30 PM – Registration Starts
1:00 PM : Introduction & Sponsor Slots ???????
1:30 PM : Significance of stakeholder collaboration in blog and new media space: Ajay Jain
2:00 PM : Blogs/New Media and Corporate???????? Communications: An interactive session moderated by Rajesh Lalwani
2:30 PM : 3:00 PM : TEA BREAK
3:00 PM : Blogs/New Media: Tips for Beginners & Advanced Users: Amit Gupta and Abhishek Baxi
3:30 PM : Blogging in Hindi & Regional languages: Ashok Chakradhar
4:00 PM – 5:00 PM : Open House: Working together and growing in the future
5:00 PM – 6:00 PM : Structured Networking
6:00 PM onwards : Bonfire & Chitter-chatter
इतनी गहमा-गहमी में एक बात साफ तौर पर लिखी गयी है कि ब्लागरों से किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा.
यह ब्लागभेंटवार्ता कैसी होगी पता नहीं और जो लोग आयोजक के रूप में दिख रहे हैं कम से कम उनमें से शायद किसी को मैं नहीं जानता. हम जिन्हें पुराने ब्लागर मानते हैं उनमे से कोई नाम इसमें अब तक नहीं दिखा है. जो नाम दिख भी रहे हैं उनकी सहमति नहीं आयी है.
अब ऐसे ब्लाग मिलन पर मेरी आपत्तियां आपको बताता हूं.
1. सबसे पहले, निश्चित रूप से इस भेंटवार्ता के पीछे कोई व्यावसायिक नजरिया है. स्पांसरों का खेल है. और जहां व्यावसायिक नजरिया और स्पांसर पहुंच जाते हैं वहां आयोजन हमेशा निमित्त बनकर रह जाते हैं. होता यह है कि आयोजन स्पांसरों के प्रचार के काम में आते हैं.
2. इसका एक स्पांसर माइक्रोसाफ्ट है और दूसरा कोई पीआर एजंसी. ब्लागरों की गाढ़ी कमाई को कैसे कैश करना है इसकी योजना इस पीआर एजेंसी ने ही बनाई होगी और माईक्रोसाफ्ट को पटाया होगा यह तय बात है.
3. ब्लागर मिलन की शुरूआत ऐसे हुई कि भाई लिखते-पढ़ते तो देख लिया एकाध बार मुंह-दिखाई भी हो जाए. अचानक ही अखबारों आदि में हिन्दी ब्लागरों की पर्याप्त चर्चा हो गयी. जाहिर सी बात है अब आप अपना खून-पसीना बहाकर जो कुछ रचना कर रहे हैं कुछ व्यवसायी मानसिकता के लोग अब उसको कैश कराने की कोशिश करेंगे. उनकी नजर में किसी भी प्रकार के कार्य का यही सफल उपयोग होता है. आखिरकार सबकुछ बाजार जो है.
4. हो सकता है एक ब्लागर के रूप में आप इस मिलन में शामिल हों और कुछ माले-मुफ्त दावत उड़ाकर संतोष कर लें लेकिन आपको इस बात का कतई अंदाजा नहीं होगा कि आपको पता भी नहीं चलेगा और आपको सरे बाजार बेच दिया जाएगा.
5. दिल्ली में ब्लाग मिलन बंद हुआ चंडूखाने की एक पोस्ट की वजह से. यार अगर कहीं से सुन रहे हो तो वहां जाना जरूर. हो सकता है इस बार तुम्हारा जाना शुभ साबित हो.
ब्लाग मिलन की यह व्यावसायिक शुरूआत शुभ संकेत नहीं है. सह-अस्तित्व और परिवार भावना की नींव पर खड़ा ब्लाग समुदाय अगर इस तरह के व्यावसायिक प्रयासों को मान्यता देता है तो हिन्दी ब्लागिंग के स्वभाव को विकृत होने से कोई बचा नहीं सकता.
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मैं भी इस प्रोफेशनल ब्लॉगर मीट की सूचना पाकर अचंभित हूं। दिल्ली में होता तो गुमनाम बनकर इसका नज़ारा देखने ज़रूर जाता। वैसे इसका आयोजन अमित गुप्ता(itsme.wordpress.com) कर रहे हैं। इसलिए थोड़ी गंभीरता तो नज़र आती है।
माइक्रोसॉफ्ट को पटाया गया होगा? नहीं सरकार मेरी, माइक्रोसॉफ्ट को पटाया नहीं गया बल्कि माइक्रोसॉफ़्ट ने ही पटाया है। बेचारी 10:20 मीडिया तो बस एक एवेन्ट मैनेजमेन्ट कम्पनी है। असल बात यह है कि ब्लागर भाई तो ओपिन सोर्स को तरजीह देते हैं जो बिल्लू के लिये मुसीबत की जड़ है. इससे पहले भी बिल्लू महाशय ब्लागर्स को महंगी गिफ्ट देते रहे हैं। हिन्दुस्तान का बाजार एक बड़ा बाजार बनने वाला है। कौन इससे बेरुख हो सकता है?
अशोक चक्रधर तो माइक्रोसॉफ्ट के सशुल्क सलाहकारों में से एक हैं। लेकिन क्या एसा होना बुरा है? फिर भी आप भी यहां जरूर जाईये और मामला घुस कर देखिये. ब्लागिंग के स्वभाव को विकृत करने की कुव्वत को किसी के दिल गुर्दे की नहीं है.
ये चंडूखाना क्या है? इस पोस्ट का लिंक भी तो दीजिये
यह ब्लॉगर मीट हिन्दी वालों का ब्लॉगर मीट नहीं है, मूलतः यह अंग्रेज़ी का ही ब्लॉगर मीट है. हाँ, हिन्दी वाले अमित इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं. मगर वो अंग्रेज़ी में भी उतने ही सक्रिय हैं. और हिन्दी समेत किसी भी भाषा के ब्लॉगर आमंत्रित हैं.
और, इस तरह के दैत्याकार ब्लॉगर मीट चेन्नई से लेकर बैंगलोर – पुणे तक पहले भी दर्जनों हो चुके हैं और होते रहेंगे और इनसे ब्लॉगिंग को हानि नहीं होती उसे दिशाएँ मिलती हैं, और ब्लॉगरों को नई तकनीकें सीखने सिखाने में मददगार होती हैं.
जून में पुणे में हुए ब्लॉगकैम्प का विवरण यहाँ पढ़ें- और हो सके तो पूरा चिट्ठा पढ़ें
http://www.blogcamppune.blogspot.com/
आपकी और अनिलजी की चिंता में साझी हैं हम भी।
अमित का नाम आश्वस्त करता है ..ठीक। पर अशोक चक्रधर का नाम निश्चित ही चिंतित करने वाला भी है।
व्यावसायिकता तो चलो ऐसा हे कि टाले नहीं टलेगी। बिल्लू नहीं आएंगे तो रफ्तार, खोज, बेवदुनिया कोई और आता…आना भी होगा ही। व्यवसायिकता से इस मंडी के दौर में बचना जरा कठिन है पर …मामला पूरी तरह नेटवर्किंग का ही जान पड़ता है।
खैर शुभकामनाएं
जहां मीट न हो
सिर्फ मीत हो
जाने में कोई
नहीं है बुराई
कहीं पर जाना
किसी से मिलना
जानना सीखना
होता है नया
सब कुछ है
आसपास हमारे
तुम्हारे हमें
जानना पहचानना
है, अच्छा रखना
बुरा तजना है
पर छांटने के लिए
माल चाहिए,
मिलना जुलना
अवश्य चाहिए
दूर रहकर क्या
सीख सकते हैं
सीखने में
नहीं है कोई
बुराई, हमारी
समझ में तो
यही बात आई।
ओपेन सोर्स का नाम लेकर इस मिलन को हतोत्साहित करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है। मुझे तो लगता है कि माइक्रोसाफ़्ट का इसमें सहयोग करना एक अच्छी बात है। इससे हिन्दी सहित अन्य भाषाओं के ब्लागिंग को गति मिलेगी। जहाँ तक नामी-ग्रामी ब्लागरों के इससे दूर रहने का सवाल है, ये भी एक अच्छी चीज है – हमे खुश होना चाहिये कि नये लोग आगे आ रहे हैं।
संजयजी , इन करतूतों का पर्दाफाश करते रहें।अम्बानी अपने ‘अड्डे’ के प्रसार हेतु ऐसी कोशिशें करते रहे हैं। जिनकी लार टपक रही है , उन्हें भी पहचानें। आपकी चिन्ताओं से सहमत हैं । साहित्य में चक्रधर का जो स्थान है चिट्ठेकारी में इस जमावड़े का वैसा स्थान होगा।
संजय जी, आपने जो भी बाते कहीं हैं, यकीन मानिए यदि मैं इस मामले से वैसे न जुड़ा होता जिस तरह से जुड़ा हूँ तो ऐसी ही कुछ बातें मेरे दिमाग भी उभरती, कि क्या गोल माल हो रहा है, कुछ न कुछ दाल में काला है या दाल ही काली है आदि।
आपके उठाए प्रश्नों के उत्तर भी तसल्ली से दूँगा, अभी थोड़ा व्यस्त हूँ इसलिए सिर्फ़ १-२ बात कहना चाहूँगा।
कुछ लोगों को माइक्रोसॉफ़्ट से ऐतराज़ है कि वो क्यों है। यकीन मानिए कि ऐसे बहुत से लोग हैं। लेकिन जो ओपन सोर्स को लेकर हल्ला करते हैं उनमें गिनती के ही लोग हैं जो उसको समझते हैं। मैं भी ओपन सोर्स पर कार्य करता हूँ, मेरी रोज़ी भी ओपरसोर्स माल को इस्तेमाल करने से चलती है और मैंने ओपनसोर्स में जितना हो सका उतना योगदान भी दिया है।
माइक्रोसॉफ़्ट यहाँ इसलिए है क्योंकि इतने बड़े आयोजन में लगने वाले खर्चे को वह भी उठा रहा है। बाकी माइक्रोसॉफ़्ट वहाँ आकर यह नहीं कहने वाला कि हमारी खिड़की इस्तेमाल करो या .net प्रयोग करो, यकीन मानिए ऐसा होता तो मैं स्वयं नहीं जुड़ता इस मामले से।
और जो 2020Media को लेकर कह रहे हैं, वे शायद इस रोचक तथ्य को नहीं जानते कि यह कंपनी गूगल बाबा की पीआर कंपनी है, गूगल देव का काम देखती है, माइक्रोसॉफ़्ट से तो इसका दूर-२ का लेना देना नहीं। बल्कि माइक्रोसॉफ़्ट का इस तरह का काम इनकी प्रतिद्वद्वी कंपनी Text100 देखती है।
है ना रोचक बात?
बाकी आप सभी से निवेदन है कि एक बार दूसरे पर विश्वास कर उसको परखिए तो। बिना परखे तो सोने का भी पता नहीं चलता कि वह असली है कि नहीं। इसलिए आप सभी से सप्रेम निवेदन है कि आप आएँ, इस सम्मेलन में भाग लें और फिर अपने विचार व्यक्त करें। सूली पर चढ़ाए जाने से पहले तो न्यायाधीश भी एक बार को मरने वाले की अंतिम इच्छा पूछता है, आप तो माई बाप यहाँ बिना पूछे ही टाँग दिए हैं।
सबसे पहले तो मै एक निवेदन करना चाहूंगा कि, शक की नजर से मत देखिए किसी को। इस तरह की मेल मुलाकातों से ही नयी राहें खुलती है।
दूसरा व्यवसायिकता से इतनी चिढ क्यों? क्या आप नही चाहते कि ब्लॉगिंग मीडिया की मुख्यधारा मे शामिल हो, एक स्थायी स्तम्भ बने, यदि हां, तो इसको व्यवसायिक होना ही पड़ेगा, आज नही तो कल, माइक्रोसाफ़्ट नही तो गूगल, वैबदुनिया नही तो अंबानी, विदेशी नही तो देसी, कोई ना कोई तो आगे आएगा जरुर। जाहिर है, उसके अपने भी हित होंगे, लेकिन आपको उसका विरोध ना करते हुए, अपने हितो की सुरक्षा करते हुए आगे बढना है, और बढना पड़ेगा। हाथ से हाथ मिलेगा, तभी समुदाय आगे बढेगा।
क्या आपको पता है, विदेशों मे ब्लॉगिंग करने वाले, कित्ता कमाते है? कित्ता नाम है उनका? यदि नही तो थोड़ा पढिए, थोड़ा चिंतन करिए। अपने स्टैंड पर दोबारा सोचिए, नही तो वामपंथियों की तरह समय सिर्फ़ दूसरों को कोसने मे ही निकाल देंगे। कुछ गलत कहा तो क्षमा चाहूंगा, लेकिन बस इतना जरुर कहूंगा कि चिंतन करिए और विश्वास करना सीखिए।
वाह वाह अविनाश जी आप तो लाख टके की बात कह गए. अगर कुछ नए मीत बन जाए और कुछ नया सीख लिया जाए तो हर्जा ही क्या है . उत्साह मे आ कर अगर कुछ नए ब्लागर पैदा हो जाए तो बुरा ही क्या है .
200 -300 me se agar ek ek zeero hataden aur 20 plus kar den to itne to aaye hee thay.
vaise anand bhee khoob aaya.
Angreji ka dhol bhee bazaya gaya.
par won zyada nahin baza, hindi ki hee har variety ki daal galee.
Jise galane me Bhadas wale Yashwant ki ek aham bhumika rahee.
Isse to angreji jhharhne walon ko bhee inkaar nahin hoga.
tabhee to unke fotu kai adayon me nazar aaye hain.
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