मैं इन खबरों से बहुत उत्साहित हूं कि तीन बड़े अखबार व्यावसायिक हिन्दी पत्रकारिता में पदार्पण कर रहे हैं. इकोनॉमिक टाईम्स का हिन्दी संस्करण, बिजनेस स्टैण्डर्ड का हिन्दी संस्करण और दैनिक जागरण सीएनबीसी समूह का हिन्दी अखबार. जबसे ये खबरें आ रही हैं उत्साहित भी हूं और उन बातों को सच होते देख रहा हूं जो छह-सात साल पहले लोगों से कहता था कि भविष्य में व्यावसायिक अखबार मुख्यधारा के अखबार हो जाएंगे. हो सकता है शुरूआती दौर में पहुंच सीमित हो लेकिन आप देखेंगे कि इनका प्रभाव व्यापक होगा.
सहमति-असहमति अपनी जगह लेकिन हिन्दी में व्यावसायिक पत्रकारिता के अवसर बहुत हैं.
1.यह बदलते समय के साथ भाषा का कदमताल होगा.
समाज का केमिकल तेजी से बदल रहा है. बीस साल पहले जो बातें बहुत प्रासंगिक थी आज उनका कोई मतलब नही रह गया. खाने-कमाने के तरीकों में भी तेजी से बदलाव आ रहा है. ऐसे में भाषा को उसी विधा के साथ काम करना होगा जो समाज की जरूरत बन गया हो. ऐसे में हिन्दी पत्रकारिता बहुत देर तक बिजनेस पत्रकारिता से अलग नहीं रह सकती.
2. व्यवसाय के तरीके बदल गये हैं
भारत मूल रूप से विकेन्द्रित बाजार व्यवस्था में काम करता था. लेकिन बीस सालों में सरकारी प्रयासों के कारण बाजार केन्द्रित होता जा रहा है. अब जब बाजार केन्द्रित हो जाता है तो सूचना माध्यमों की अहमियत बहुत बढ़ जाती है. मसलन कंपनियों को उत्पादन का प्रचार करने का संगठित जरिया चाहिए तो उपभोक्ता को भी केन्द्रित रूप से सूचनाएं चाहिए. अगर उसे कोई शिकायत हो तो शिकायत दर्ज करने का मंच भी चाहिए. ऐसे में अखबार सूचना के सबसे ताकतवर माध्यम के रूप में लोगों के पास पहुंचेगे.
3. शेयर बाजार की पहुंच बढ़ी है
शेयर बाजार की पहुंच बड़ी तेजी से नीचे तक पहुंची है. आज शेयर बाजार में ऐसे-ऐसे निवेशक खड़े हो गये हैं जिन्हें अंग्रेजी का एबीसीडी भी नहीं आता लेकिन वे यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा लगाये गये पैसे का क्या हाल-हवाल है. अपनी भाषा में वह जानकारी पाना चाहेगा.
4. उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन और वितरण
एक बड़ा बदलाव आया है. एक आम शहरी या मध्यवर्ग का इंसान नागरिक से ज्यादा उपभोक्ता हो गया है. यह कंपनियों के लिए बहुत अच्छा संकेत है. इसका परिणाम यह होगा कि ब्राण्ड की मारामारी बढ़ेगी और लगातार ब्राण्ड वैल्यू को निखारने की दिशा में काम होगा. यानी खबरों का नजरिया पूरी तरह से व्यावसायिक होना चाहिए.
…लेकिन चुनौतियां बहुत हैं
अभी हिन्दी में बिजनेस पत्रकारिता का मतलब है कंपनियों का समचार छाप देना. थोड़ा बहुत यह बता देना कि बजट कैसा होगा और वित्त मंत्रालय क्या कर रहा है इसे बता देना. तो क्या यही सब 24 पन्नों में फैल जाएगा? मेरा मानना है कि बिजनेस पत्रकारिता को ज्यादा बड़ी भूमिका निभानी चाहिए. उन्हें दकियानूसी करार दिये जा चुके भारतीय बाजार व्यवस्था को नये सिरे से रिपोर्ट करना चाहिए। शेयर बाजार, कंपनियों की रिपोर्टिंग और सरकारी प्रयासों के बारे में खबर लिखना ही होगा लेकिन उनको अपनी शुरूआत से ही क्रिटिकल रहना चाहिए। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखना हो तो जी बिजनेस और सीएनबीसी आवाज के फर्क का अध्ययन करना चाहिए.
आमतौर पर यह समझा जाता है कि बिजनेस पत्रकारिता का मतलब होता है केवल कंपनी समाचार. मेरी समझ से बिजनेस पत्रकार के सामने ज्यादा बड़ी चुनौती होती है. प्रतिष्ठान को भी इस बारे में सावधान रहना चाहिए कि विज्ञापन मिलने का यह मतलब नहीं होता कि आप कंपनियों की पीआर एजंसी बनकर र
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समीक्षा अच्छी है
सुंदर और ज्ञानवर्धक समीक्षा के लिए साधुवाद।
“असल में हिन्दी में ढेर सारे लोग चाहिए जो पर्यावरण, विज्ञान, तकनीकि, उद्योग, उद्यमिता, व्यवसाय, सरकार, पानी, पैदावार, व्यापार के वैश्विक मंच, विदेश व्यापार में कम से कम एक विषय पर काम करने की समझ रखते हों.”
मुझे आशा है कि हिन्दी पत्रकार इन सब चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये अपने को सक्षम बनाने में सफल होंगे।
जी एक तो आप हम को मान लो जी.आपके सुझाये विषयों में एक से ज्यादा विषय पर काम करने की समझ है जी
वैसे यह हिन्दी के बढ़्ते बाजार का सूचक है.
संजय भाई सही कह रहे हैं कि भविष्य में व्यावसायिक अखबार मुख्यधारा के अखबार हो जाएंगे। मैंने अपने कुछ साथियों के साथ अमर उजाला कारोबार निकालने में मदद की थी। वह यकीनन काफी सफल अखबार रहा था। अब नया मौका आ रहा है। देखिए क्या होता है?
यह तो मस्त खबर है जी! कब आ रहे हैं हिन्दी में ये अखबार?
आपकी तमाम मान्यताओं का समर्थन करता हूं। बढ़िया पोस्ट ।
Hindustani ho kar ke sarmaate hai hindi se
Neta dete English bhasan madam sarmati bindi se
Madam sharmati bindi se bachcho ko amrica padhwati
Hindi ka to shavd bhool gayee chitthee naukar se bachwati
Jitane neta afsar hai angreji me batiyaate hai
Koi ghabraate hindi se koi ghabraate shindhi se
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Mantri ji bhasan jab dete angreji ke hawale
Angreji ko tauheen samajahte upaji bare gharane
Har daftar me angreji ki chalti dhar-dhar bhasha
Jo angreji bole na jaane chaprashi ki nahi hai aashaa
Inko to ab dolar chaahiye ghabraate hai khinni se
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Hindi diwas pe neta kahate hindi ka utthan karo
Ham bharat ke rahane wale sari janata saath chalo
Bharat ki yahi bidambana dhoop chaaw jo sahati hai
Ham us desh ke washi hai jis desh ke ganga bahati hai
Jahar samajh parsaad na lete ghabraate hai sinnee se
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shambhu nath
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