ब्लागरी करते एक साल बीत गया. पिछले साल ऐसी ही गर्मियों के बीच अप्रैल के दूसरे हफ्ते में पहली बार यूनिकोड हिन्दी में लिख सका था. लिखते-मिटाते जो पहली पोस्ट प्रकाशित हुई वह हुई 26 अप्रैल को लेकिन मुझे खूब याद है 16 या फिर 17 अप्रैल को मैंने सबसे पहले यूनिकोड हिन्दी में टाईप किया था. ब्लाग तो और पहले मार्च के आखिरी हफ्ते में ही बना लिया था.
अब उन दिनों को याद करता हूं रोयां कांप उठता है. आज कोई कहे कि सब भूलकर नये सिरे से वही सब शुरू करो तो शायद मुमकिन न हो. कोई जुनून ही था कि सालभर में एक ऐसी यात्रा कर सका जो भविष्य में संभावनाओं के द्वार खोलती जान पड़ती है. मुझे एचटीएमएल का एच नहीं आता. और कुछ पता भी नहीं था. कम्प्यूटर पर काम करता था लेकिन इंटरनेट का उतना ही उपयोग जितने से ईमेल वगैरह चेक कर लें. वह भी कभी-कभार. मैं अक्सर इस डिब्बे के सामने बैठकर सोचता था कि आखिर यह डिब्बा मेरे लिए क्या संभावना के द्वार खोल सकता है? और मुझे कोई रास्ता निकलता दिखाई नहीं पड़ता था.
वह तो विमल सिंह और ललन पाण्डेय ने बता दिया कि देखिए ऐसे मंगल फाण्ट में टाईप करते हैं. और तरीका भी बताया कि मंगल फाण्ट कैसे अपने कम्प्यूटर में इंस्टाल किया जाता है. एक दिन की मेहनत में सब काम हो गया. तुक्के में दिख गये ब्लागर पर हफ्तेभर की मेहनत के बाद ब्लाग बना ही लिया था किसी तरह. लेकिन लिखना अभी भी बहुत मुश्किल था. इसलिए नहीं कि लिखना नहीं आता था. बल्कि इसलिए कि लिखने के लिए जिस की-बोर्ड का इस्तेमाल किया जाता है उसके बारे में अभ्यास करने की जरूरत थी. एक कीबोर्ड भूलना था दूसरे को रट्टा मारना था.
सालभर में अकेले विस्फोट पर कोई 1100 बार लोगों ने टिप्पणियां कीं. लेकिन पहली टिप्पणी मिली थी परमजीत बाली की. फिर दूसरी प्रतीक पाण्डेय की कि आपका ब्लाग हिन्दी ब्लाग्स में शामिल कर लिया गया है. इसके बाद जीतेन्द्र चौधरी का सुझाव आया कि आपका ब्लाग बहुत अच्छा है इससे नारद में शामिल करवा लीजिए. बाद में बहसों के बीच कई बार घिरा लेकिन परमजीत बाली की पहली टिप्पणी शायद कभी न भूलूं. हालांकि मैं उनके ब्लाग पर उतना नियमित नहीं रहा क्योंकि वे कविताएं ही करते हैं और मुझे कविताओं से एलर्जी है. फिर भी मैं हमेशा उनके प्रति सहृदय रहा. कभी मौका मिला तो उनसे मिलना भी चाहूंगा.
क्योंकि उस पहली टिप्पणी ने मुझे वही आनंद दिया जो मुंबई के नवभारत टाईम्स में पहली बार छपी मेरी चिट्ठी ने दिया था जिसे विशेष पत्र बनाकर छापा गया था. मेरे प्रिंट पत्रकारिता की शुरूआत वहीं से हुई. बाद में कितने बाईलाईन और कहां-कहां लिख रहा हूं लेकिन मुझे वह आनंद दोबारा न मिला जो नवभारत टाईम्स की उस पहली प्रकाशित चिट्ठी से मिला था. मेरे अंदर यह विश्वास जागा था कि मैं लिख सकता हूं. और केवल लिख ही नहीं सकता मेरे लिखे को नोटिस किया जा सकता है.
परमजीत बाली की पहली टिप्पणी ने मुझे यह अहसास कराया कि कुछ लोग तो हैं जो देख रहे हैं. फिर सालभर जो हुआ वह तो सब ब्लागर साथी जानते ही हैं. अब अपने दो डोमेन के साथ विस्फोट ब्लाग भी लिख रहा हूं. जानता तो अभी भी कुछ नहीं लेकिन जो करना चाहता हूं वह किसी तरह हो जाता है बस. थोड़ा जिद्दी हूं इसलिए पीछे लौटकर नहीं देखता. हिन्दी के पिछड़ेपन का दंश झेलता हूं इसलिए कोशिश रहती है कि स्तरीय सामग्री पर काम किया जाए. काम भी ऐसा कि दूसरी भाषा के लोग लालायित हों कि मुझे यह जानना है इसलिए मुझे हिन्दी सीखना है.
इसलिए आज के साहित्यकारों को मैं हिन्दी पर बोझ मानता हूं. पिछले कई दशकों से हिन्दी साहित्य बोझ की तरह भाषा पर हावी है. उसके गर्भ से सिर्फ साहित्य की टुच्ची राजनीति ही निकली है जिसने भाषा को गरिष्ठ बना दिया है. वेब उस जड़ता पर कहीं से प्रहार करे और हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान, कला, संस्कृति, बाजार और बाजार के वि
रोध की भी भाषा बनाए इस निमित्त जितना हो सकता है कर रहा हूं. शायद सालभर में इतना ही सीख पाया.
फिलहाल तो इंटरनेट की दुनिया में कुछ ऐसा गुम हुआ कि मौत ही यहां से बाहर निकाले. तब तक जो बन सके करते रहें यही आनेवाले सालों का एजण्डा रहेगा.
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संजयजी सालगिरह मुबारक़ । योगदान जारी रहे ।
CANGRATULATIONS for ur first birthday of bloging…kafi achha laga aapke baare mein padhkar,kafi hosla mila ki main bhi ye safar jaari rakhun,mujhe aapki help ki zaroorat hogi,senior blogger hone ke naate itna to aapka farz huaa na?
ब्लॉग की वर्षगांठ मुबारक हो . विविध विषयों पर ऐसे ही लिखते रहें .
सालगिरह की मुबारक, हम भी हाल ही में इस “अनोखे” अहसास से निकले हैं…
बधाई स्वीकार करें, शुभकामनाएं!
विस्फोट बहुत से मायनों में अलग है!
ब्लॉग की पहली वर्षगांठ मुबारक हो
बहुत बहुत मुबारक एवं अनेकों शुभकामनायें.
सालगिरह मुबारक।
वर्षगांठ मबारक
विस्फोट अपने लक्ष्य तक पहुंच जाय, इन्ही कामनाओं के साथ
संजय भाई, 101 फीसदी यकीन के साथ कह रहा हूं कि आपका जीवट रंग लाएगा। आज हमारे समाज, देश और भाषा को आप जैसे ही जमीन में धंसे साधकों की ज़रूरत है जो आसमान को साधने की सामर्थ्य रखते हैं। आप जैसे साथियों की सक्रियता मुझे जैसे लोगों को भी बराबर उत्साहित करती है। चलते रहें, कारवां बनता जाएगा।
सजयभाई,
आपका सरोकार आपके ब्लॉग को पढ़्कर चलता है,आज आप जैसे लोगों की वाकई ज़रूरत है….अपना अभियान ज़ारी रखें ….हमारी भी बधाई स्वीकार करें…..
बहुत बहुत मुबारकबाद एक साल पूरा करने की ।
आपके लेखन का कायल हूं और नियमित आता हूं ।
आपका जुनून बना रहे ।
हमने भी इसी महीने अपनी ब्लॉगरी के एक साल पूरे किए हैं ।
लो जी आपने भी एक साल पूरा कर लिया. बहुत बहुत बधाई. अब आप भी पक्के नशेड़ी हो गये है. स्थायी ब्लॉगर हो गये है.
पूनः बधाई.