अंग्रेज जो नहीं कर पाये वह हमारे नेता और नौकरशाह कर रहे हैं. टिहरी में अंग्रेजों द्वारा लाख कोशिशों के बावजूद बांध नहीं बनाया जा सका था. मदन मोहन मालवीय जी के आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि 1916 में एक ऐसा समझौता हुआ जिसके कारण गंगा की अविरल धारा बनी रह सकी. लेकिन हमारे काले अंग्रजों ने जबर्दस्ती न केवल बांध बनाया बल्कि अब टिहरी से भी आगे उत्तरकाशी में मनेरी भाली में गंगा पर एक और बांध बनाने का काम शुरू हो चुका है.
इसे रोकने के लिए लोग आंदोलन कर रहे हैं. पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल ने घोषणा की है कि अगर सरकार इस योजना को रोकते हुए गंगा के प्रवाह को अविरल नहीं रखती तो वे आत्मोत्सर्ग कर देंगे. देशभर से आंदोलनाकरी और गंगाभक्त उत्तरकाशी पहुंच रहे हैं. इन घटनाओं को देखते हुए विस्फोट.काम नियमित तौर पर गह्वर में गंगा नाम से एक सीरिज शुरू कर रहा है. अगर आप इस विषय पर कुछ लिखना चाहते हैं या आपके पास कोई सूचना है आप हमें भेज सकते हैं. इस कड़ी में पहला लेख आज प्रकाशित हुआ है जिसे सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ला ने लिखा है.
सादर,
संजय तिवारी
मॉडरेटर, विस्फोट.कॉम
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Isase bada saarthak kuch naheen kiya ja sakta.durbhagya yeh hai ki ganga ko maan kahane wale ham bhrtiyon ka hee naitik patan is had tak ho gaya hai ki ham na sirf maan ko gandee kar sakte hain,nangee kar sakte hain balki bench bhee sakte hain.