अनिल रघुराज की जायज चिंता पर बहुत सारे नाजायज तर्क हो सकते हैं. फिर भी अनुभव से यही समझ में आता है कि टैग का सबसे बेहतर फायदा तभी मिलता है जब आप कम से कम टैग का इस्तेमाल करते हैं और एक ही टैग को बार-बार अपनी पोस्टों में प्रयोग करते हैं. लेकिन जनता जनार्दन इस गलतफहमी से बाहर ही नहीं आना चाहती कि हजार टैग देने से आपके पाठक नहीं बढ़ जाएंगे. गूगल के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वह आपके टैग के आाधार पर आपकी पोस्ट को खींचे और और लोगों को पढ़ाये. हां कुछ हद तक यह काम याहू करता है लेकिन ब्लागस्पाट पर बने ब्लाग याहू के लिए ज्यादा मायने नहीं रखते. इसलिए अगर ब्लागस्पाट पर अपना ब्लाग लिखते हैं तो वहां लगाये गये टैगों का दूसरे सर्च इंजनों और खुद गूगल के लिए भी कोई मायने नहीं रखता.
मान लीजिए आप ब्लागर की जगह पर अपना ब्लाग लिखते हैं तो वहां टैग देने का आपने अपने ब्लाग के भीतर किसी विषय पर आपके लेखों को खोजने की सुविधा होती है. मसलन आपने देश में किसानों के ऊपर काफी कुछ और अलग-अलग समय पर लिखा है. अगर आप चाहते हैं कि कोई पाठक एक शब्द के द्वारा आपके उन सारे लेखन तक पहुंच जाए तो आपको टैग बहुत मदद कर सकता है. यही बात वेबसाईटों पर भी लागू होती है. मसलन मैं अपनी वेबसाईट विस्फोट पर बहुत कम टैग का प्रयोग करता हूं लेकिन कई लेखों में एक ही टैग का प्रयोग करता हूं जो उस विषय से संबंधित होते हैं. मसलन आप अगर वेबज्ञान टैग पर क्लिक करेंगे तो आपको विस्फोट पर वेब से जुड़ी जानकारियों के जितने भी लेख हैं वे सब सामने आ जाएंगे भले ही उसे किसी ने भी लिखा हो.
वर्डप्रेस टैग को विशेष महत्व देता है. लेकिन वहां भी अनाप-शनाप तरीकों से टैग लिखने का कोई खास फायदा नहीं है. वर्डप्रेस में आजकल कुछ ऐसे टेंम्पलेट जरूर आ गये हैं जो टैग के आधार पर केटेगरी का निर्धारण भी कर देते हैं.लेकिन थोक में टैग देने की गलत आदत लगी है उन वेब व्यापारियों के भ्रम के कारण जो कहते हैं कि वे आपकी साईट का सर्च इंजन आप्टिमाईजेशन कर देंगे. उन्हीं लोगों ने उस दौर में ऐसी कुछ तकनीकें विकसित कर रखी थी जो सर्च इंजन को पूरा डाटाबेस खोजने की बजाय सिर्फ एक खास बक्से या हिस्से से ही शब्दों का चुनाव कर लेते हैं. लेकिन अब सर्च इंजन ही यह काम नहीं करते. वे क्षणभर में आपकी पूरी साईट खंगाल डालते हैं. इसे परखना हो तो आप खोज परिणामों के कैच रिजल्ट देख लीजिए.
इसलिए टैग को एसईओ का भ्रम फैलानेवाले वेब व्यापारियों की नजर से देखने की बजाय थोड़ा यथार्थपरक नजरिए से देखिए. लिखने और अच्छी सामग्री पर जोर दिजीए. सर्च इंजन के रोबो विजिटर बाकी सारा काम अपने आप करते हैं. उन्हें टैग की चटनी चटाने की जरूरत नहीं है. टैग आपके अपने ब्लाग और वेबसाईट पर पाठकों की सुविधा को देखते हुए इस्तेमाल करिए. परेशान करने के लिए नहीं.
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आदरणीय तिवारी जी,
बात निकली है और नाम लिया गया है तो मेरे विस्तारित जवाब का भी इंतज़ार करें… पहले से ही “नाजायज़ तर्क” का नाम न दीजिये… और टैग पढ़ने के लिये क्या किसी ने पाठक को बाध्य किया है? और रही बात “कंटेण्ट” की तो मेरे ब्लॉग के कंटेंट से मैं फ़िलहाल सन्तुष्ट हूं…
hum to naye navadite hain samajh hi nahi paye ye tag,pasand aur page ranking hai kya bala,likho aur post karo,neki kar dariya me dal
सुरेश भाई मैंने किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं लिखा है. मुझे जितनी तकनीकि जानकारी है उसे ध्यान में रखते हुए लिखा है. वह कम ज्यादा भी हो सकती है.
मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत नहीं हूं. सर्च इंजन टैग को भी इंडेक्स करते हैं. मुझे अपनी साइट के एक टैग ने रेकार्ड ट्रैफिक दिलाया. यह अलग बात है कि उसमें इस्तेमाल किया गया शब्द जरा अलग था. उसका उल्लेख यहां नहीं कर पाउंगा. लेकिन आप सागर न्यूज़ को सर्च करेंगे तो आपको मेरी साइट का टैग आर्काइव ही सरे फहरिस्त मिलेगा. सर्च इंजन टैग को महत्व नहीं देते लेकिन इग्नोर भी नहीं करते. कम से कम वर्डप्रेस पर चलने वाली साइट में इस्तेमाल टैग के बारे में तो इतना कह सकता हूं.