यह दिल्ली का एक आम दिन है। आज 23 दिसंबर है और रोज की तरह आज भी बाहर भारी हिमपात हो रहा है। तापमान -10 डिग्री सेल्सियस है। मैं सुबह से अपने घर में हूं। हालांकि ऐसा कम ही होता है जब मैं बाहर निकलूं। 76 साल की उम्र में मेरे पास करने के लिए अब कुछ खास है भी नहीं। यह तो नहीं कह सकता कि मैं अकेला हूं क्योंकि दिनभर मैं अपने वर्चुअल सेट के साथ खिलवाड़ करता रहता हूं। दस साल पहले ही अपने हाथ में मैंने एक माइक्रोचिप लगा ली थी जिससे अब मैं मानसिक रूप से लगातार जिससे चाहूं संपर्क में बना रहता हूं। इनमें से कई चांद पर स्थाईरूप से बस चुके हैं और कुछ समुद्र में बसाई गयी बस्तियों में रहते हैं। खरीदारी की कोई खास जरूरत आजकल है नहीं फिर भी कुछ खरीदना हो तो मैं अपने वर्चुअल सेट का सहारा लेता हूं। अभी कल ही 20 लीटर पानी मैंने नीलामी में खरीदा है जो मुझे बाजारभाव से बहुत सस्ते में मिल गया। बहुत दिनों से मैं लगातार समुद्र का रिफाइन्ड पानी पी रहा हूं। आजकल मीठा पानी मिलना बहुत मुश्किल है। इस 20 लीटर पानी को मैं लंबे समय तक सहेजकर रखने की कोशिश करूंगा। हालांकि बाहर गिर रही बर्फ को भी मैं प्रोसेस करके मीठे पानी के रूप में प्रयोग कर सकता हूं लेकिन मेरा सर्वर ऐसा करने से मुझे मना कर रहा है। बर्फ विषाक्त है और पानी के रूप में प्रयोग होने लायक प्रोसेसिंग की तकनीकि अभी विकसित की जा रही है। जिस दिन यह तकनीकि बाजार में आ जायेगी उसके बाद शायद मीठे पानी की समस्या थोड़ी कम हो सके। आप सब जानते ही हैं नदियां कब की सूख चुकी हैं क्योंकि ग्लेशियर पूरी तरह से जम गये हैं। वर्षा भी न के बराबर होती है।
अभी सी साईबोर्ग प्लस का एक मैसेज मेरी मेमोरी में आया है। वह मैसेज पढ़ने के लिए मुझे जाना होगा. थोड़ी देर में मैं फिर आता हूं.
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गुड है! इस पर तो सीरीज होनी चाहिए भाई।
आने वाले समय मे ये सब बाते एकदम सच्ची हो जाएंगी।
जिस तरह से हम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ कर रहे है उसके परिणामस्वरुप हम बूंद बूंद पानी को तरस जाएंगी।
अच्छा भविष्य दर्शन कराया है।बधाई।
संजय बाबू बढ़िया है
आलोक पुराणिक
achha science fiction hai. Ye vidha hindi mein kam hai magar viksit jaroor honi chahiye.
बधाई।
भाई, ये मेरी विगयान कथ का भी शीर्शक है। कभी मौका मिले तो ज़रूर देखें।
बढ़िया!!
इसे एक सीरीज़ का रुप दें!!
काल्पनिक, लेकिन भयानक और वास्तविक लगने वाला दृश्य… बेहतरीन प्रस्तुति