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नया एग्रीगेटर, लेकिन इसमें नया क्या है?

Posted by संजय तिवारी on Sep 26th, 2008 and filed under टेक्नालाजी के तीर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

ब्लागरों के लिए बड़े दिनों बाद एक नया एग्रीगेटर आया है. पिछले साल ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत बनने के बाद बात शांत हो गयी थी. जितनी तेजी से ब्लाग बढ़े एग्रीगेटर नहीं बढ़े. शायद जरूरत भी नहीं थी. क्योंकि एक अगर ठीक से काम करे तो नियमित लिखनेवाले ब्लागरों के लिए वह ज्यादा सुविधाजनक होता है. वैसे गूगल तो सबसे बड़ा एग्रीगेटर है ही जो अपने ब्लाग सर्च के जरिए आपको उपलब्ध सभी ब्लागों की सामग्री मुहैया करवाता है. वैसे भी नेट पर एक क्लिक करना नौ मन माटी ढोने की थकान भर देता है. ऐसा लगता है जैसे बीघा भर खेत जोतकर लौटे हैं. 

लेकिन हिन्दी के सर्च इंजन रफ्तार ने काफी मेहनत मशक्कत के बाद नया एग्रीगेटर लांच कर दिया है. साफ-सुथरा है और वही काम करता है जो दूसरे एग्रीगेटर करते हैं. आप लिखिए वह आपके लिखे को दूसरों तक पहुंचाएगा. रफ्तार दिल्ली स्थित एक कंपनी इंडिकस एनेलिटिक्स के सहयोग से चलनेवाला सर्च इंजन है जो काफी दिनों से हिन्दी में सर्च की सुविधा मुहैया करा रहा है. मैंने पिछली बार जब रफ्तार देखा था तब उसका स्वरूप भिन्न था. प्रयोग हो रहे थे. इस बार जिस रफ्तार को देख रहा हूं वह ज्यादा सुघड़ है और कई तरह की सुविधाओं के साथ है.

ब्लाग के अलावा समाचार, फोटो, गानों का भी वर्ग है. हिन्दी में लाईफस्टाईल को देखते हुए एक हाईलाईफ सेक्शन भी है तो ईकलम नाम की फाण्ट कन्वर्टर सुविधा भी दी गयी है. वैसी ही सुविधा जो ब्लागवाणी का इंडिनेटर या फिर अपने रजनीश मंगला का फाण्ट से यूनिकोड वाला सेक्शन देता है. लेकिन रफ्तार में ईकलम प्रयोग करने के लिए आपको रजिस्टर करना होता है. थोड़ा झंझट का काम है इसलिए रजिस्टर करके फाण्ट कन्वर्टर प्रयोग करने से बेहतर है कि आप इंडिनेटर का आफलाईन या परिवर्तन को डाउनलोड कर लें. मैथिली जी के इंडिनेटर में कुछ कमियां रह गयी हैं, वही हाल रजनीश मंगला के उपकरण में है. आप भी मेल करिए कि वे कमियां सुधार दें तो लोगों को सुविधा होगी. मैंने तो अपनी तरफ से सुझाव दे दिया है.

हां, इस नये एग्रीगेटर में एक नया प्रयोग किया गया है कि आप उनके साथ विज्ञापन करना चाहते हैं तो उनसे संपर्क कर सकते हैं. यानी ब्लाग के व्यावसायिक युग की शुरूआत एग्रीगेटर के स्तर पर. अगर कोई एग्रीगेटर ब्लागरों को बेहतर सुविधाएं देता है तो उसके विज्ञापन से कमाई पर कौन अंगुली उठा सकता है. अभी तक हिन्दी ब्लाग्स, चिट्ठाजगत, नारद और ब्लागवाणी चारों ही एग्रीगेटर धर्मादय और हिन्दी सेवा के नाम पर घर फूंक तमाशा देख रहे हैं. ये व्यावसायिक लोग नहीं है. ये जज्बेवाले लोग हैं जो नेट पर अपने स्तर पर जितना हो सकता है हिन्दी को बढ़ाने का काम कर रहे हैं. इसके अलावा भी कुछ एग्रीगेटर आये लेकिन उनका व्यावसायिक नजरिया शायद ब्लागरों को नहीं भाया इसलिए उनको राम-राम करना पड़ा. हिन्दी के कुछ चर्चित एग्रीगेटर अपने एग्रीगेटरों का स्वरूप व्यावसायिक करते हैं तो निश्चित रूप से हिन्दी ब्लागरों को उसका स्वागत करना चाहिए. आखिर बिना कमाई के कोई सेवाभाव से कब तक ब्लागरों को ढोता रहेगा. और अगर किसी दिन वह सिरा टूट गया तो फिर ब्लागरों का क्या होगा?

इस लिहाज से रफ्तार का नजरिया ठीक कहा जा सकता है. हिन्दी सेवा का दौर पीछे छूट रहा है. चिट्ठाजगत का आंकड़ा बता रहा है कि इस हफ्ते ८२४ चिट्ठों से कोई २८४५ लेख पहुंचे हैं. आज से साल भर पहले इतनी सक्रियता महीनों में दर्ज होती थी. वह अब हफ्तों में हो रही है और जल्द ही वह वक्त आयेगा कि ऐसी सक्रियता रोज-रोज की होगी. निश्चित ही तब एग्रीगेटरों का वह स्वरूप नहीं रहेगा जो आज दिख रहा है. अगर एग्रीगेटरों को समग्र रूप से सबको समेटते हुए चलना है तो उनको अपनी शैली और पद्धति दोनों बदलनी होगी. यह सब होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. इस कसौटी पर नया-नया आया रफ्तार भी खरा नहीं उतरता. उसका भी तरीका वही है जो पहले से चले आ रहे एग्रीगेटरों का है. फिर इसमें नया क्या है?

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6 Responses for “नया एग्रीगेटर, लेकिन इसमें नया क्या है?”

  1. venus kesari says:

    रोचक जानकारी देने के लिए धन्यवाद
    वीनस केसरी

  2. जानकारी देने हेतु धन्यवाद

  3. जानकारी के लिए आभार, कुछ नया ही आयाम लाना होगा-लगी आदत छुड़ाने के लिए इतना काफी नहीं है अभी.

  4. बहुत बेहतर
    बेहतरीन
    यही है अब
    ताजातरीन
    और लगता
    हसीन।

  5. Anunad Singh says:

    हिन्दी-जगत को ऐसे ही अच्छी-अच्छी चीजें उपलब्ध होती रहें। अधिकाधिक लोग हिन्दी से जुड़ें। हिन्दी में अधिकाधिक और विविधता से सम्पन्न सामग्री जुड़ती जाय। हिन्दी में सर्वत्र नवाचारी (इन्नोवेटिव) माहौल विकसित हो। यही कामना है।

  6. kanishka says:

    हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर को भी समय के साथ खुद को उपग्रेड करते रहेने की आवश्यकता है. उनके तकनीक , उपयोग और सुविधाओं में सुधार ही उन्हें कारगर बना सकता है. हाँ निष्पक्ष होना पहली शर्त है.
    ब्लॉगप्रहरी डॉट कॉम एक ऐसा प्लेटफार्म है , जिसने एक ब्लोग्गर के सभी पहलुओं को केंद्र में रख कर हिंदी ब्लॉग्गिंग का संपूर्ण मंच बन गया है.
    ब्लॉगप्रहरी से समस्त हिंदी जगत लाभान्वित होगा, ऐसी कामना है. ब्लॉगप्रहरी एग्रीगेटर वास्तव में सर्वगुण संपन्न है .
    जिस प्रकार सतयुग में भगवान परशुराम आठ कलाओं से युक्त थे, भगवान राम बारह कलाओं से युक्त थे , कृष्ण को १६ कलाओं से युक्त हो द्वापर में निर्वाह करना पड़ा. क्योंकि त्रेता में तीन अंश सत्य और एक अंश असत्य का समावेश था.. द्वापर में २ अंश सत्य और दो अंश असत्य हुआ. अब कलियुग है ..जहाँ ३ अंश असत्य और १ अंश सत्य का साशन है .
    अब प्रभु का अवतरण होता है , तो उन्हें भी भगवान कहलाने के लिए २० कलाओं से युक्त होना पड़ेगा.
    जिस प्रकार की अन-एथिकल प्रयोग ब्लोग्गर , एग्रीगेटर के साथ करने लगे थे , और जिस तरह के आक्षेप एग्रीगेटर को झेलने पड़े .. वह वास्तव में दुखद रहा. सभी को पता है कि एग्रीगेटर , हमारे ब्लॉग की तरह मुफ्त में नहीं चलते. उसे बनाने में ५० हजार से ३ लाख तक का खर्च आएगा.
    ब्लॉगवाणी एक बहार सशक्त प्लेटफार्म है , अगर आप किसी वेब डिजायन कंपनी से वैसी एक साइट बनाने की बात करें तो आपको से १ से ३ लाख तक रुपये का बजट मिलेगा.
    इतना ही नहीं ..ऐसे एग्रीगेटर को चलाना भी मुफ्त का काम नहीं. हजार ब्लोग्स को एकत्रित करने के लिए एग्रीगेटर पर महीने का ३ हजार रूपया खर्च होना ही हैं. यह भी तब , जब आप स्वयम तकनिकी जानकार है. तो होस्टिंग पर खर्च ही आपका महीने का खर्च होगा. वर्ना एक तकनिकी दक्ष व्यक्ति इसके सञ्चालन के लिए चाहिए . यानी १५ हजार से कम में … आप १००० ब्लोग्स की क्षमता वाला एग्रीगेटर खड़ा करने की नहीं सोच सकते. मुफ्त में आने वाले संसाधनों में कोई न कोई कमी है .. जो इसे संपूर्ण नहीं बना सकती.
    अब १५ हजार रुपये महीने खर्च करने केलिए सोचना पड़ेगा. क्यों की आर्थिक आय का कोई साधन न होना , संपूर्ण जिम्मेदारी इसके संचालक के पॉकेट पर आती है. यह किसी हिंदी सेवी संसथान तो कर सकता है .. लेकिन एक व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं.

    तो हम सभी को ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करना चाहिए और हमें ऐसे प्रयासों को मजबूती देनी चाहिए. नहीं तो विदेशी बोली , विदेशी तकनीक , विदेशी मूल्य .. सभी के साथ साथ विदेशी एग्रीगेटर भी चाहिए होगा.. और हमारे हिंदी के लिए तो नहीं होगा.
    वैश्विक पटल पर हिंदी की प्रति आर्थिक सहयोग की उदासीनता को हम सभी जानते हैं. तो फैसला आपके हाथ है. स्वयं प्रयास करें , दूसरे के सहभागी बनें .. या … गूगल के हिंदी एग्रीगेटर की प्रतीक्षा करें …

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