यह तुगलक रोड, नई दिल्ली का चित्र है. केन्द्रीय सचिवालय से महरौली के लिए बननेवाले दिल्ली मेट्रो के रूट पर यह सड़क पड़ती है. यहां दिल्ली मेट्रो ने एक रात में 14 से अधिक पेड़ काट दिये और रातों-रात सारी लकड़ी गायब कर दी. संयोग से पेड़ के कुछ कटे हिस्से वहां अब भी पड़े हुए हैं जो सारी कहानी कह रहे हैं. पहले चित्र में जो खाली जगह दिख रही है वह कुल 100 मीटर कप दूरी है. इसी 100 मीटर में 14 पेड़ काटे गये हैं जो 40 साल से अधिक पुराने जामुन थे. यह जगह प्रधानमंत्री निवास से एक किलोमीटर के दायरे में है. और यहां पर्यावरण बचाने के नाम पर पत्ता तोड़ने पर भी पुलिस पकड़ लेती है. यहां रेहड़ी लगानेवाले एक दुकानदार ने बताया कि पेड़ काटने के लिए लोग रात में 12 बजे आते हैं और रातो-रात सारी लकड़ियां उठा ले जाते हैं.
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अच्छा तो ये लफ़ड़ा है!
बस यही एक तकलीफ है, विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकशान तकलीफ देय है.
ग्लोबल वार्मिंग इसीलिए बढ़ती जा रही है। पुराने पेड़ का एक पत्ता जितनी गर्मी सोखता है, नया लगाया पूरा पौधा भी उतनी नहीं सोख पाता। पेड़ काटनेवालों को उन पेड़ों में कुल जितने पत्ते थे, उतने नए पेड़ लगाने चाहिए।