यह एक आधुनिक पर्यावरणवादी की आप सबसे अपील है. अगर आप रावण जलाते हैं तो इससे कार्बन उत्सर्जन होगा जो कि पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं होगा. अगर आप चाहते हैं कि आपका पर्यावरण सुरक्षित रहे तो कृपया रावण को मत जलाईये. और रावण ही क्यों? हिन्दू लोग मृतकों का दाह-संस्कार करते हैं. एक आदमी मरा तो उसके क्रिया-कर्म में कम से कम 400-500 किलो लकड़ी जलती है. इतनी लकड़ी जलने पर कितना कार्बन उत्सर्जन होता है? एक अखबार दावा कर रहा है कि हर साल करीब 1 करोड़ हिन्दू मरते हैं. इस हिसाब से उनके जलाने पर लगभग 5 से 6 करोड़ पेड़ों का सफाया होता है. यानी लगभग 1500 से 2000 वर्ग किलोमीटर का जंगल हर साल नष्ट होता है. अखबार यह नहीं बताता कि ये हिन्दू लोग जितनी लकड़ी जलाते हैं उसके बदले में कितना जंगल लगाते हैं.
इतनी लकड़ी जलेगी तो धुंआ भी उठेगा. अखबार अपने विशेषज्ञों के हवाले से दावा कर रहा है कि इससे 80 लाख टन ग्रीन हाउस गैस कार्बन डाईआक्साईड का उत्सर्जन होता है. अब ऐसा कहने के पीछे जाहिर तौर पर सोच यही है कि हिन्दू लोग अपने मरे लोगों को चार मन लकड़ी से जला देने की मानसिकता को पीछे छोड़ दें. वे यह सोंचे कि वे दुनिया के पर्यावरण को बचाने के लिए कार्बन उत्सर्जन को कैसे रोक सकते हैं.
कुछ अच्छे सुझाव हैं. लोग चूल्हें में लकड़ी जलाना छोड़ दें. लाश को जलाने की बजाय किसी और रास्ते से उसका अंतिम संस्कार करें. गाय-भैंस पालना छोड़ दें क्योंकि भारतीय गायों और भैसों के छी करने से भी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है. और सबसे अच्छा उपाय तो यह है कि भारतीय सांस लेना ही छोड़ दें. क्योंकि जितनी बार वे सांस लेते हैं पर्यावरण में उपलब्ध आक्सीजन सोखते हैं और सांस छोड़ते समय कार्बन डाईआक्साईड बाहर छोड़ देते हैं. यह तो बड़ी नाइंसाफी है. पर्यावरण का इससे बहुत नुकसान होता है. वैसे भी भारतीयों के होने न होने का कोई मतलब तो है नहीं इसलिए वे नहीं रहेंगे तो उनके हिस्से का पर्यावरण भी पश्चिम के भोग के काम आ जाएगा.
वैसे अखबार यह नहीं बता रहा है कि एक अखबार एक दिन में कितना जंगल साफ करता है. तो क्यों न पर्यावरण को की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अखबारों के प्रकाशन को ही रोक दिया जाए? क्यों क्या ख्याल है?
Possibly Related Posts:
- भाजपा नेताओं का मक्काः झंडेवालान
- पीने का पानी
- फिर अविनाश डाल पर
- अभिव्यक्ति की चरम अवस्था
- विस्फोट.कॉम को चाहिए निहंग पत्रकार
Very good.
I like to tell that comments should also be provided to write in Hindi, atleast on hindi sites.