अगर तमिल फिल्म इंडस्ट्री तमिलनाडु में है, तेलगू फिल्म इंडस्ट्री आंध्र प्रदेश में है, बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री बंगाल में है तो हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री एक मराठी राज्य में क्यों है?
यह एसएमएस विमल सिंह ने भेजा है. अच्छा सवाल है, आपकी क्या राय है?
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वाकई अच्छा सवाल है लेकिन जबाब तो बहुत आसान है
इसलिये कि हिन्दी फिल्मों की शुरूआत में हिन्दी प्रदेश वालों ने कुछ नहीं किया. पहली फिल्म बनायी महाराष्ट्री दादा फाल्के साहब ने, इसके बाद में मादन आये वो भी मराठी, प्रभात के बाबूराव पेन्टर मराठी, बोम्बे टाकीज के हिमान्शु राय बंगाली, फिलिम्स्तान के सारे कामगार बंगाली, राजकपूर दिलीप, देव, से लेकर राजेन्द्र कुमार तक सारे हीरो पंजाबी.
मुम्बई में फिल्मी इंडस्ट्री जमाने में मराठी, पंजाबी और बंगाली ने अपना खून पसीना एक कर दिया था तब कहीं जाकर पनपी थी मुम्बई में फिल्मी इंडस्ट्री. वड़कुद्रे शान्ताराम क्या हिन्दी प्रदेश के थे? पंचाली क्या हिन्दी प्रदेश के थे? कांस फिल्म में नीचा नगर के जरिये दुनियां में पहली बार हिन्दी की पताका फहराने वाले चेतन आनन्द क्या हिन्दी प्रदेश के थे? आलमआरा बनाने वाले आर्देशिर ईरानी कहां के थे?
हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के लिये हिन्दी प्रदेश वालों ने खून पसीना नहीं बहाया. जब हिन्दी प्रदेश वाले आये तब तक मुम्बई में जम चुकी थी.
इसे उखाड़ने की अनेकों बार कोशिशें हुई, कोई उखाड़ नहीं सका
इसलिये है हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री मुम्बई में.
उत्तर देने मे इतना मरा काहे जा रहा है
क्यो कि हिन्दी इस देश की सबसे ज्यादा पढ़ने लिखने और समझने वाली भाषा है.
हिँदी मे बनने वाली फिल्म पूरे देश मे कारोबार करती है और ज्यादा मुनाफा कमाती है जब कि क्षेत्रीय भाषा मे बनने वाली फिल्म अपने क्षेत्र मे ही कारोबार करती है
दादा साहब फाल्के ने ज्यादा मुनाफे के लालच के चक्कर मे हिँदी फिल्म इंडस्ट्री की स्थापना की.
आज हिँदी फिल्म के कारण ही बंबई की पहचान है वरना बंबई को कौन पूछता.
इस हिँदी फिल्म इंडस्ट्री के कारण ही वहाँ के स्थानीय लोगो को रोजगार मिले है.
बाते तो कोई कुछ भी करे .लेकिन पेट तो हिँदी ही भरती है.
कई-कई प्रख्यात मुस्लिम निर्देशक और हीरोईनें भी अधिकतर तत्कालीन पाकिस्तान से आये हुए लोग थे, लीला चिटणीस, ललिता पवार जैसी कालजयी अभिनेत्रियाँ भी मराठी… ऐसे हजारों उदाहरण दिये जा सकते हैं… और संवेदनशील तथा सहनशील मराठी लोगों के कारण ही हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री मुम्बई में पनप और जम सकी… बाकी के लोग तो बहुत बाद में आये…
मराठी संवेदनशील और सहनशील होते है तो बाकि सब क्या जंगली और संवेदनहीन होते है.
बाते करोगे बिल्कुल मूर्खो वाली.
अभय तिवारी ने मुंबई से एसएमएस भेजा है- क्योंकि हिन्दी फिल्म रीजनल नहीं, नेशनल फिल्म इंडस्ट्री है इसलिए मुंबई में है. बढ़िया जवाब.
और कहाँ हो सकती है? हिन्दी प्रांत पहले देश की आर्थिक राजधानी पैदा करे, जो समाजवाद व साम्यवाद के दीवास्वप्न में लिप्त कैसे करेंगे. तो हिन्दी फिल्म उद्योग मूम्बई में ही रहने वाला है. वैसे भी हिन्दी किसी की बपौती है क्या?
हाँ हिन्दी हिन्दी प्रदेश वालो कि बपौती है.
और कुछ?
पहले हिंदी प्रांत का मतलब तो समझाईये? बिहार का अता-पता मालूम है मुझे सो वहीं का लिख रहा हूं.. वहां लोग हिंदी भाषी समझे जाने से पहले खुद को भोजपुरी, मगही या मैथिली वाला कहलाना पसंद करते हैं.. कमोबेश यही हाल हर प्रदेश में है..
All of the above comments of Mr. चम्पक भूमिया, suresh chiplunkar, संजय तिवारी, संजय बेंगाणी, Prashant are very nice. The comment below:
Prashant
Posted October 23, 2008 at 6:20 pm | Permalink
पहले हिंदी प्रांत का मतलब तो समझाईये? बिहार का अता-पता मालूम है मुझे सो वहीं का लिख रहा हूं.. वहां लोग हिंदी भाषी समझे जाने से पहले खुद को भोजपुरी, मगही या मैथिली वाला कहलाना पसंद करते हैं.. कमोबेश यही हाल हर प्रदेश में है..
is very very nice.
Kamal Kumar adukia