यह कोई नयी खबर नहीं है. माईकल जैक्सन ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है. खबर तो यह है कि उन्होंने इस्लाम धर्म कबूल क्यों किया? यह कोई नयी अफवाह नहीं है कि माईकल जैक्शन इस्लाम धर्म कबूल कर सकते हैं. आमतौर पर जैसा होता है पश्चिम की सेलेब्रिटी बिना प्रोपोगण्डा किये कोई काम नहीं करती. माईकल ने भी मिकाईल बनने के लिए पर्याप्त प्रोपेगण्डा किया. एक इमाम ने उन्हें इस्लाम धर्म की पवित्र पुस्तक कुरान के सामने इस्लाम कबूल करवाया.
लेिकन…..लेकिन…..लेकिन……. यह उनके इस्लाम प्रेस से अधिक उनकी तात्कालिक जरूरत है. बुधवार को लंदन की अदालत में उनकी पेशी होनी है. एक अरब शेख ने उनके ऊपर ४७ लाख पाउण्ड का दावा ठोंक रखा है. बुधवार की गवाही अहम है. उनके ऊपर शेख ने आरोप लगाया है कि पैसा लेकर उन्होंने एलबम बनाने से मना कर दिया. मिकाईल यानी अल्लाह के फरिश्तेवाला नाम धारण करने के बाद बुधवार को माईकल जैक्शन जब कोर्ट में होंगे तो अरब शेख का दिल क्या जरा भी नहीं पसीजेगा? क्या अपने ही धर्म भाई को वह लंबे समय तक कोर्ट में फंसाकर रख पायेगा? नहीं न. वैसे भी अरब शेख जिंदादिल और धर्म पर मर मिटनेवाले होते हैं. अगर उनके इस स्वभाव का अगर माईकल को फायदा मिल गया तो वह फायदा होगा ४७ लाख पाउण्ड का. अब ऐसे में इस्लाम धर्म को स्वीकार करने में आप ही बताईये क्या हर्जा है?
वैसे भी ५० साल की उम्र में एक पाप सिंगर मुसलमां हुआ तो क्या खाक मुसलमां हुआ? क्यों मिर्जा, क्या बोलते हो?
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sahi hai guru..
यह शख्श इस्लाम लायक ही था/है !
मैं जितने आँकड़े देखता हूँ, उनसे यही मालूम होता है कि अमरीका में इस्लाम को स्वीकार करने वालों कि संख्या बढती ही जा रही है (faster growing relegion in US).इस्लाम में ऐसा क्या है जो लोगों को आकर्षित कर रहा है?
सुब्रमणियन जी यहाँ आकर्षण या विकर्षण की बात नहीं है, असल में आम अमेरिकी ने आज तक किसी अन्य धर्म के बारे में सोचा/जाना तक नहीं था, लेकिन 9/11 के बाद से उनमें एक भय तो व्याप्त है ही, यह जानने की उत्कण्ठा भी है कि आखिर ऐसा इस्लाम में क्या है कि लोग स्वयं को मार देने पर भी उतारू हो जाते हैं। यह इस्लाम को “जानने की भूख” है, और ऐसे समय में अमेरिका में “इस्लाम” की मार्केटिंग भी सही तरीके से हो रही है, सो आश्चर्य नहीं कि इस्लाम अपनाने वाले ज्यादा बढ़ गये हैं, हालांकि इनमें “सेलेब्रिटी” लोगों की संख्या ज्यादा है, आम अमेरिकी गोरों की नहीं, वह अभी भी कट्टर ईसाई ही है… चूंकि हिन्दुओं ने आज तक किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा और न ही हिन्दुत्व की “मार्केटिंग” आक्रामक तरीके से की गई इसलिये यह धर्म उतना प्रचार नहीं पाता, फ़िर यदि कोई विदेशी व्यक्ति हिन्दुत्व को अपनाना भी चाहे तो कैसे अपनायेगा? क्या वह यज्ञोपवीत पहनकर ब्राह्मण बनेगा या दलित बनेगा? या ठाकुर या बनिया? इसलिये बात इस्लाम में आकर्षण की नहीं है यह एक तात्कालिक फ़ैशन है…