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राजनीति को गाली इस देश का पुराना फैशन है

Posted by संजय तिवारी on Dec 2nd, 2008 and filed under दिल्ली दरबार. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

राजनीति को गाली देना एक फैशन है. पढ़े लिखे और समझदार होने की निशानी है. ठीक वैसे ही जैसे आप बात करते करते एक दो शब्द अंग्रेजी के बोल दें तो तुरंत प्रतिक्रिया आती है कि अरे आप तो पढ़े लिखे आदमी हैं. ऐसे ही अगर आप राजनीतिज्ञ को गाली देते हैं तो समझा जाता है कि आप इस देश के जागरूक नागरिक हैं. लेकिन कौन लोग हैं जो राजनीति को गाली दे रहे हैं?

उनका न इस देश में कोई विश्वास है, न यहां की राजनीतिक प्रक्रिया में कोई हिस्सेदारी. उन्हें क्या हक है जो वे राजनीति को गाली दें? जो पैदा ही इस सपने के साथ होते हैं कि किसी तरह विदेश जाकर सैटल हो जाएं और अपने घर के दरवाजे के बाहर झांककर कभी देखते तक नहीं कि बाहर की दुनिया को भी उनकी जरूरत है या नहीं? सुबह से शाम तक सिर्फ अपने लिए परेशान ऐसे स्वार्थी नागरिकों द्वारा राजनीति और राजनीतिज्ञों को गाली देना शोभा नहीं देता.

मैं दावे से कह सकता हूं जो लोग राजनीति और राजतिज्ञों को गाली दे रहे हैं उनको एक मौका दीजिए वे तुरंत अमेरिका भाग जाएंगे.

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6 Responses for “राजनीति को गाली इस देश का पुराना फैशन है”

  1. अरूण says:

    अजी आप कित्ते मौके देलो हम यही रहेंगे और गालिया भी देंगे. नरक बना दिया है इन्होने भारत को .हमे पता था कि आप एक दिन ऐसा ही कहेगे इसलिये हमने पास्पोर्ट तो छोडिये राशन कार्ड तक नही बनवाया जनाब :)

  2. Suresh says:

    राजनीति तो ख़ुद ही एक गाली है. प्रजातंत्र में राज की नीति का कोई स्थान ही नहीं है. प्रजातंत्र में प्रजा की नीति होनी चाहिए. जनता अपने प्रतिनिधि चुनती है पर चुने जाने के बाद यह प्रतिनिधि राजा की तरह बर्ताव करते हैं और जनता पर राज करते हैं. ऐसे राजनेता देश और समाज पर एक गाली हैं.

  3. अरूण जी आप पर बात लागू नहीं होती.

  4. virender singh says:

    yeh soch thik nahi hai vese to yeh lok tantr ke nam par raj tantra hai

  5. virender singh says:

    kya sboon or tel bechne wale sadi ke mahanayak ho sakte hai ?

  6. virender singh says:

    ya wo jinhone es desh ki aazadi ke liye haste haste fansi ka funda pahna

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