एन्ड्रू और जो कह रहे हैं कि खुशी सस्टेनबल होनी चाहिए. कैसे? अपने आस-पास उपजा अन्न खाओ. बड़ी खुशी मिलती है. फासिल फ्यूल (पेट्रोल आदि) के कारण ऐसी सुविधा मिल गयी है कि आदमी अपने आस-पास का अन्न खाना भूल ही गया है. The fact that fast food and ready meals have gone up in price now that they reflect their full ecological costs, has seen a revival of home cooking. कौन सुनेगा यहां अपने देश में इनकी बात. यहां तो अभी मैकडोनाल्ड जाकर बीमारी खरीदने की होड़ लगी हुई है. होड़ इस बात की लगी हुई है कि आधुनिक हो जाने के नाम पर कौन कितनी बीमारी खरीद लाता है.
अपने आस-पास के माहौल को समझो. खरीदारी भी करनी है तो शापिंग माल में मत जाओ. अपने आस-पास के दुकानदार से खरीदो. लेखक द्वय लिखते हैं- Computer connections aside, there are plenty of benefits in the new sense of community that has evolved from the revival of local shops (where the shopkeepers actually remember who you are) and the way that residential streets and town centers have become people-friendly.
अगर अमेरिका की इस मंदी में खुशी के इन तलाशते कारणों को समझें तो कितनी बड़ी संपत्ति हम लोग बर्बाद करने पर उतारू हो गये हैं. शापिंग माल क्यों होना चाहिए? शापिंग माल के कारण जो ये दोनों लेखक अमेरिका के हैं. वहां की यस मैगजीन में लिखते हैं. ये लेखक कह रहे हैं कि आपने बाजार की जो नयी समझ बना ली है उसे भूलिए. लोकल हो जाईये. अपने आस-पास देखिए. कम्युनिटी वगैरह बनाने के इंटरनेटी पंगों से बाज आईये. आपके आस-पास भी एक समाज है. एक बाजार है. उसके महत्व को समझिए.
अमेरिका ने मंदी की मार खाकर यही सीखा है. सामान खरीदने में खुशी नहीं है. नये तरह के बाजार बढ़ाने में खुशी नहीं है. खुशी कहीं और है.
अब क्या कहें. अमेरिका को छोड़िए अपने देश के पागलपन को देखकर मैं तो कुछ बोलूंगा ही नहीं.
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अपने आस पास में उगा खाईये…कितनी पास का?
फिर तो मैं पंजाब का उगा धान कैसे खाऊँगा? राजस्थान का बाजरा कैसे खाऊँगा. बिहार भी कुछ उगा कर भेजता होगा?
अपनी समझ में नहीं आया. और मैकडोनाल्ड का खाना और भारतीय फूटपाथी व्यंजन सभी नुकसानकारी है. बुराई है तो दोनो में है.
कोई भी चीज अच्छी-बूरी उसके गुणों से होनी चाहिए न कि अन्दरूनी-बाहरी आधार पर.
अब भाई इसे समझने के लिए आपको एग्रो क्लाईमेट जोन समझना होगा. प्रकृति का मनुष्य के शरीर पर होनेवाला परिणाम समझना होगा. किसी एक एग्रो क्लाईमेट जोन में जो कुछ पैदा होता है वही आपका भोजन है क्योंकि आपका स्वभाव भी उसी वातावरण के अनुसार होगा. सीधी सी बात है.