अब लोग जिक्र करने लगे हैं कि वेब का इस्तेमाल पत्रकारिता के तौर पर किया जा सकता है. अगर हम हिन्दी वेब को पत्रकारिता के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो सबसे संभावनायुक्त कौन लोग हो सकते हैं? मेरी नजर में हिन्दी ब्लागर सबसे अधिक संभावना से युक्त हैं कि वे वेब का माध्यम पत्रकारिता के तौर पर इस्तेमाल करें.
मैं हमेशा से इस बात का पक्षधर रहा हूं कि ब्लाग को निजी कुंठा निष्कासन मार्ग बनाने की बजाय अपने काम का माध्यम बनाना चाहिए. पिछले दो सालों से लगातार मैं जिनसे भी बात करता हूं इसी नजरिये को उनके सामने रखता हूं. कुछ लोगों ने समर्थन किया तो कुछ मानते हैं कि ऐसा करना अभी संभव नहीं है क्योंकि बाजार बहुत सीमित है. लेकिन अब मैं आपको कुछ अनुभव बांटना चाहता हूं.
आज दो साल बाद मैं यह देख रहा हूं कि जो भी अखबार हैं वे अपना वेब संस्करण मजबूत करना चाहते हैं. और जो नये प्रकाशन अस्तित्व में आ रहे हैं वे अपना वेब संस्करण भी लाना चाहते हैं. अब एक मुश्किल यह आ रही है कि पत्रकार आमतौर पर तकनीकि दक्ष नहीं है. जो तकनीकि दक्ष हैं वे वेब की दुनिया को नहीं समझते. जो वेब की दुनिया और तकनीकि दोनों को समझ सकते हैं वे पत्रकारिता नहीं करते.
इस उलझन को कैसे सुलझाया जाए? जो युवा हिन्दी ब्लागर हैं वे इस बारे में सोचें. वे अगर अपने आप को थोड़ा विकसित कर लेते हैं तो वे भविष्य के बेहतर वेब पत्रकार साबित हो सकते हैं. क्या हिन्दी ब्लागर इस दिशा में सोचेंगे?
जो लोग वेब पत्रकारिता को अपना पेशा बनाना चाहते हैं उनके लिए जरूरी है कि वे कुछ बातों पर ध्यान रखें-
१. हिन्दी में वेब पत्रकारिता के लिए सबसे अहम बात है कीबोर्ड की जानकारी. यह थोड़ा असहज है लेकिन सच्चाई यही है. आप अगर इनस्क्रिप्ट की बोर्ड के जानकार हैं तो समझिए पहली बाधा पार हो गयी.
२. इंटरनेट पर हिन्दी में काम करने के लिए जरूरी है कि आप यूनिकोड तकनीकि पर काम कर सकें. यह कोई लंबी चौड़ी तकनीकि नहीं है. एक सामान्य से सिद्धांत पर काम करती है. लेकिन माइक्रोसाफ्ट, एप्पल और लाइनक्स तीनों बड़े आपरेटिंग सिस्टम यूनिकोड फाण्ट के साथ जो डिफाल्ट की बोल्ड ले आउट देते हैं वह इनस्क्रिप्ट ही होता है. इसलिए कीबोर्ड और यूनिकोड दोनों पर सम्यक जानकारी होनी चाहिए.
३. वेब पत्रकार के लिए सबसे अहम है कि वह क्या लिख रहा है. वेब पत्रकारिता परंपरागत पत्रकारिता से बिल्कुल अलग है. न केवल तकनीकि बल्कि प्रस्तुति के लिहाज से भी. मुख्य रूप से लिखने के दो प्रकार हैं. अगर आप समाचार लिख रहे हैं तो सिर्फ सूचना देने तक अपने आप को केन्द्रित रखें और 500 शब्दों से अधिक में न लिखें. लेकिन अगर आप लेख लिख रहे हैं तो बात दूसरी है.
४. विचार से ज्यादा सूचनाओं पर ध्यान दें. क्योंकि वेबसाइट का सर्वाधिक उपयोग सूचना पाने के लिए ही किया जाता है, बहस करने के लिए अन्य दूसरे साधन मसलन फोरम, ब्लाग और सोशल नेटवर्किंग साइटें तो हैं ही.
५. एक समाचार को एक ही जगह प्रकाशित करें. बहुत सारे वेब जर्नलिस्ट यह गलती करते हैं कि एक ही समाचार को कई जगह प्रकाशित करने की कोशिश करते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. क्योंकि यहां आखिर में सारे पाठक एक या दो सर्च इंजनों के जरिए ही आ रहे हैं.
६. संदर्भ और स्रोत का भरपूर उपयोग करें क्योंकि आप जो भी जानकारी पाना चाहते हैं वह इंटरनेट पर एक खोज की दूरी पर है. इसलिए गलत सूचना को देने की बजाय उसे इंटरनेट पर ही खोजकर पुष्ट कर लें.
७. तकनीकि से घबराएं नहीं. यह आपके उपयोग के लिए बनी है. इसे समझें और उसका अपने लिहाज से इस्तेमाल करें.
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संजय जी मैं आपसे सहमत हूँ. जिस तेज़ी से ऑनलाइन हिन्दी का विस्तार हो रहा है उसमे वेब पत्रकारिता का बेहतर भविष्य ही दिखाई दे रहा है. सभी को तकनीक दक्ष बनाने के हम सभी को मिलकर आगे कदम बढ़ाना होगा.
शुक्रिया
गिरीन्द्र
आप ने बिलकुल ठीक लिखा है। आने वाले समय के लिये तैयारी तो करनी ही होगी। समय के साथ बदलना ही होगा।
aane waalaa samay web kahi hogaa…iske liye abhi se tayyaar ho jaanaa chahiye
apke anusar ane wala samay web ka hoga par esa bhi hoga ki print media apna astitva jas ka tas rkh payegi. ha hme badalan hi par purane ko bhulna hmari soch ho skti hi kya.
web patrakaarita se log apne aas-paas ghatit hone wali ghatnaon ke prati sachet honge.