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फिर अविनाश डाल पर

Posted by संजय तिवारी on Mar 28th, 2009 and filed under बात करामात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

हिन्दी ब्लाग मोहल्ला के माडरेटर अविनाश दिल्ली लौट आये हैं. अविनाश से अपना परिचय ज्यादा पुराना नहीं है. जब ब्लाग जगत में आया तो मोहल्ला ब्लाग ने आकर्षित किया था. इसका कारण यह था कि शुरूआती दिनों में ही स्तरीय सामग्री का ब्लाग लगा. उसकी वैचारिक बाध्यता अलग लेकिन सामग्री का चयन उम्दा होता था. फिर अविनाश से मुलाकात हुई ब्लागवाणी चलानेवाले मैथिली जी के आफिस में. साफ बोलनेवाले आदमी लगे. थोड़ा आकर्षण बढ़ा. फिर एक दो बार हमारे दफ्तर में उनसे मुलाकात हुई.

यह वही समय था जब वे एनडीटीवी में थे. इसके बाद वे भास्कर गये. मैंने पूछा क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि पदोन्नति संतोषजनक नहीं है इसलिए भास्कर जा रहे हैं, भोपाल. जब यह सब बात हुई तब तक उनके ब्लाग पर कुछ ऐतिहासिक विवाद हो चुके थे और बहुत सारे लोग उनके ब्लाग की गली छोड़कर जा चुके थे. क्योंकि मेरी कोई खास गिनती नहीं है इसलिए मेरे जाने का मोहल्ला पर कोई असर नहीं पड़ा. अविनाश से बात होती रही. मैं उन्हें समझता रहा, वे भी मुझे समझते रहे होंगे. खैर, वे भोपाल गये तो सिलसिला भी खत्म हो गया.

लेकिन अचानक एक दिन पता चला कि वे दिल्ली लौट आये हैं और चौथी दुनिया ने उन्हें अपने यहां रख लिया है. भोपाल में किसी लड़की के साथ जोर-जबर्दस्ती करने के आरोप में उन्हें भास्कर समूह ने अपने यहां से निकाल दिया था. मुझे खास तो पता नहीं है लेकिन दोनों तरह की बातें सुनने में आयी. एक, उनके खिलाफ षण्यंत्र हुआ और दूसरा नहीं अविनाश ने गलती की थी. जो भी हो कयास लगाने से ज्यादा कोई इस मामले में पक्के तौर पर कुछ कह नहीं सकता.

लेकिन चौथी दुनिया में अविनाश की खबर सुनी तो थोड़ा चौंका. थोड़ा चौंका ही नहीं सन्न रह गया. जिन्होंने मुझे यह बताया मैंने उनसे तो कुछ नहीं कहा लेकिन मुझे पता नहीं क्यों अच्छा नहीं लगा. ऐसा शायद इसलिए क्योंकि संयोग से चौथी दुनिया से थोड़ा मैं भी जुड़ा था और उसकी पत्रकारिता के बारे में एक-दो बार लिखा भी था. संतोष भारतीय से हुई मुलाकात में ऐसा लगा था कि वे पत्रकारिता में नया प्रयोग करने की जद्दोजहद कर रहे हैं. उनके साथ जुड़ा लेकिन मेरा स्वतंत्र स्वभाव और उनकी संस्थागत मजबूरियां दोनों के बीच कोई तालमेल नहीं बैठा. उनकी हर ईमानदार कोशिश मेरे स्वतंत्र स्वभाव के आड़े आ गयी. उन्होंने मुझे कहा कि तुम हर प्रकार से मेरे साथ जुड़ सकते हो लेकिन शायद नियति को हमारा जुड़ना मंजूर नहीं था और अबकी मेरा स्वास्थ्य ऐसा बिगड़ा कि एक बार फिर उनके साथ नहीं जुड़ पाये. खैर, मेरा जुड़ना न जुड़ना कोई मायने नहीं रखता.

लेकिन अविनाश चौथी दुनिया चले गये हैं यह सुनकर मुझे थोड़ी पीड़ा इसलिए भी हो रही है कि संतोष भारतीय ने मुझसे जो बातें कहीं थी कम से कम अविनाश उन बातों की कसौटी पर कहीं से खरे नहीं उतरते. एनडीटीवी और दैनिक भास्कर जैसे व्यावसायिक संस्थानों के साथ भी उनके संबंध मधुर नहीं रहे फिर संतोष भारतीय तो बड़ी नैतिक टाईप की पत्रकारिता करने की बात कर रहे थे. फिर उनको ले-देकर अविनाश का ही नाम क्यों मिला? इस सवाल का जवाब मेरे पास नहीं है. मैं उनके इस निर्णय पर सवाल भी नहीं उठा रहा हूं और मैं यह भी नहीं चाहता कि अविनाश बेरोजगार ही घूमते रहें. लेकिन चौथी दुनिया में अविनाश कौन सी पत्रकारिता करेंगे यह सोचता हूं अपने उस लिखे पर शर्म आती है जो मैंने चौथी दुनिया के बारे में कभी लिखा था.

जैसे व्यावसायिक कामों के लिए व्यावसायिक लोगों की जरूरत होती है वैसे ही नैतिक कामों के लिए नैतिक लोगों की जरूरत होती है. अविनाश प्रिंट की पत्रकारिता करने में सक्षम व्यक्ति हैं. हो सकता है कि संतोष भारतीय ने अपनी किसी मजबूरी के चलते उन्हें अपने साथ लिया हो लेकिन क्या अब भी संतोष भारतीय पत्रकारिता के दर्शन पर उतनी ही बेबाकी से बात कर पायेंगे जैसा उन्होंने पहली मुलाकात में की थी. मुझे लगता है कि अगर वे नैतिक आदमी हैं तो जरूर उन्हें थोड़ी झिझक होगी. नहीं तो दुनिया है, यहां सब कुछ चलता है.

अभी इतना ही, जरूरी हुआ तो कुछ और बातें भी लिखेंगे.

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5 Responses for “फिर अविनाश डाल पर”

  1. राम भरोसे says:

    दिल्ली की लडकियो सावधान . सविता भाभी का पति चौथी दुनिया बनाने दिल्ली आ गया है
    वामपंथी बलातकारियो की ताकत बढाने . अब वामपंथी देश और देश के नागरिको से हर तरह का ब्लात कार करने मे नयी शक्ती के साथ योगदान देंगे

  2. AMan Maula says:

    Avinash ki pol har kahin khul chuki hai. Ghatiya admi bhi padhe-likhe hone ka chola odhe rakhte hain. ye admi to Balatkari jaise khitab pane ke baad bhi sharminda nahi hua. Phir isne apne blog par naga hokar dikhaya.
    logo ne kaha ki bhai benami hokar kyon galiyan likhte ho to bola ye to meri naitikta hai ki jo koi kuchh comment dega main publish karunga.
    ab jab ise gali padnee shuru hui to apne khilaf wali benami tippaniyan rok dee aur apnee tareef mein jaree rakhee hain
    kisi ne is Kallu (jiske munh par charitrheenta ki kalikh hai) theek hi kaha hai

  3. sateesh says:

    Ghatiya admi ka kachha chitha bahut sharmnak hai

  4. Avinash says:

    shukriya sanjay ji…

  5. Dr. Govind says:

    अविनाशजी जब आप संजयजी को सुक्रिया कह रहे हैं तो संजयजी के इस articale को अपने blog और पोर्टल पर डालने का कष्ट भी कीजिए..

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