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चारे पासे सुख हूण किसी ने ना दुख हूण

Posted by संजय तिवारी on Jun 18th, 2009 and filed under बियाबान में शोर. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

घोर कलियुग में अगर कोई गाते-बजाते आपको यह सुनाए तो अचानक ही उस ओर ध्यान जाता ही है. 3.27 मिनट का एक छोटा सा वीडियो बाबा नानक से प्रार्थना कर रहा है कि सबको खुशी देना. जिनके पास घर नहीं है, उन्हें घर देना. जिनके पास खाने को अन्न नहीं है उन्हें अन्न देना. सारी दुिनया में कोई गरीब न रहे. कोई ऐसा न बचे जिनको रूखी सूखी भी न मिल रही हो.

अपने सुख और सुविधा के चक्कर में हम सब इतने परेशान रहते हैं कि दूसरे के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिलता. बचा खुचा समय है तो परिवार है, परिचित हैं जिनके लिए बहुत कुछ करने की जरूरत होती है. फिर उनके लिए कौन सोचे जिनके बारे में सचमुच सोचने की जरूरत है. अच्छा सोचे न सही तो बात तो करे. लेकिन इस बारे में हमारे आस-पास का माहौल बड़ा रूखा सूखा है.

जिस पंजाबी संगीत की पूरी दुनिया में धूम है उस पंजाबी संगीत से आम आदमी और लोकजीवन पूरी तरह से गायब हो चुका है. पंजाबी में गाने गुनगुनाने वाले कलाकार मानते हैं कि यह प्रोफेशनल अप्रोच नहीं है, इसलिए वे जो कुछ गाते हैं उससे न पंजाबियत का अहसास होता है और न ही उस समृद्ध सोच का असर दिखाई देता है जिसकी शुरूआत नानक बाबा से होती है. कई बार तो ऐसा लगता है कि पंजाबी समाज ही सबसे अधिक स्वार्थी हो गया है. सेवा भी कर्मकाण्ड होकर रह गया है. ऐसे में पंजाबी संगीत के किसी कोने से अगर रविन्दर ग्रेवाल सुनाई पड़ते हैं तो सहज ही आकर्षित करते हैं.

बस इसीलिए यह वीडियो आपके लिए ……रविन्द्र गरेवाल

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1 Response for “चारे पासे सुख हूण किसी ने ना दुख हूण”

  1. बहुत सुंदर लिखा आप ने

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