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समलैंगिकता के सवाल पर संघवाले चुप क्यों हैं?

Posted by संजय तिवारी on Jul 7th, 2009 and filed under हाहाकार. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि समलैंगिक होना अपराध नहीं है. उसके इस फैसले के बाद पूरे देश में साफ तौर पर लोग तीन हिस्सों में बंट गये. एक वह जो इसका समर्थन कर रहा है. ऐसे लोगों की तादात बहुत थोड़ी लेकिन शक्तिशाली है. इसलिए सबसे ज्यादा इन्हीं लोगों की आवाज सुनाई दे रही है. दूसरे वह लोग जो इस मुद्दे का विरोध कर रहे हैं. इनकी संख्या बहुत अधिक है लेकिन ये लोग व्यवस्था और मीडिया के बहुत प्रभावी लोग नहीं है इसलिए इनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही है. एक तीसरे प्रकार का वर्ग है जो हर मुद्दे की तरह इस मुद्दे पर पूरी तरह से उदासीन है.

इस मसले पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अधिकांश राजनीतिक दल बोल रहे हैं. पक्ष में तो कोई नहीं है लेकिन सीपीएम जैसे कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रगतिवाद के नाम पर इसका समर्थन भी किया है तो यह कहते हुए समलैंगिक संबंध रखनेवालों को अपराधी करार नहीं दिया जाना चाहिए. लेकिन घोर आश्चर्य है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस पूरे मसले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है. संघ के लोग मानते हैं कि राष्ट्र की शुचिता और पवित्रता बनाये रखनी है तो परिवार व्यवस्था और विवाह व्यवस्था की शुद्धता को बनाकर रखना होगा. फिर भारत की परिवार व्यवस्था पर हमला करनेवाले इस सबसे घातक फैसले के बाद भी संघवाले चुप क्यों हैं?

केवल संघवाले ही चुप नहीं है. संघ की राजनीतिक ईकाई भाजपा भी इस मसले पर मौन साधे हुए है. संघ से जुड़े एक दो संगठनों के प्रमुखों ने कुछ टीवी चैनलों पर जाकर बात की लेकिन उनके पास भी विरोध का न तो कोई ठोस तर्क था और न बात कहने का आधार. वे बार-बार कुछ रटी रटाई बातों पर ही रपट्टा लगा रहे थे. लेकिन संघ के पास अब अपना एक प्रवक्ता होता है जो हर वक्त, अधिकांश मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण साफ करता रहता है. फिर समलैंगिकता के मुद्दे पर संघ क्यों नहीं बोल रहा है? भाजपा कोई बयान क्यों नहीं दे रही है? विश्व हिन्दू परिषद के लोग इस बारे में अपना कोई बयान क्यों नहीं दे रहे हैं?

कायदे से होना तो यह चाहिए था कि राष्ट्रवादी दल इस अति संवेदनशील मुद्दे पर हंगामा खड़ा कर देते. लेकिन लालू और मुलायम जैसे “सांप्रदायिक” और “अराष्ट्रवादी” लोग तो खुलकर बोल रहे हैं और कानून बनाने पर अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं लेकिन संघ और उससे जुड़े बड़े संगठन चुप्पी लगाकर बैठे हुए हैं. क्यों?

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11 Responses for “समलैंगिकता के सवाल पर संघवाले चुप क्यों हैं?”

  1. Dr.Manoj Mishra says:

    vh isliye kyon ki aur log abhee bol rhe hai.

  2. बोलने से क्या होगा?

    बोलते हैं तो कहते हो बोलते हैं हाफ पैंटिये….

  3. मौन स्वीकृति लक्षणं!

  4. कभी कभी चुप रह जाना भी अच्छी नीति होती है !

  5. कम से कम यह मुद्दा ऐसा है कि आज चुप रहे तो पीढ़ियां भुगतेगी? क्या फिर भी चुप रहना सही होगा?

    आश्चर्य यह है कि कोई राष्ट्रवादी संगठन इस बारे में नहीं बोल रहा है. क्यों?

  6. क्यों बोलेंगे और वो भी विरोध में,मन की मुराद जो पूरी हुई।..

  7. mahashakti says:

    kya bulvana chate hai ?

  8. tsaliim says:

    हो सकता है वहां चलता हो।
    ह ह हा।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  9. shankar says:

    sangh walo ke to man ki urad puri ho gayee unke pas kuchh kam to hai nahi ab to ab khali dimaag shaitaan ka ghar smajh lo priye

  10. Mr.Carrot10 says:

    The key to determining the safety of foods in the refrigerator and freezer is knowing how cold they are. ,

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