28 जून को भटकते-भटकते मैं चिट्ठाजगत पहुंच गया. जहां 690 चिट्ठों का कच्चा-चिट्ठा रखा हुआ है… अगर आप पहले से जानते हैं तो मेरी लेट-लतीफी को बिसार दीजिए. अगर नहीं तो आप खुद यहां जाकर देख लीजिए. हो सके तो अपनी साईट पर लिंक जरूर दें.
मुझे तो विपुल, आलोक और कुलप्रीत का चिट्ठाजगत प्रयास सराहनीय लगा है. पाण्डेय भैया, नारद टीम, ई-पण्डित सहित उन सबको मैं नमन करता हूं जो नेट पर भाषाविकास के प्रयास में स्वयं से प्रेरित हैं.
एक बार आप भी देख लें. चिट्ठाजगत
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संजय तिवारी जी; आपने तो बहुत देर कर दी;
श्री आर सी मिश्रा ने तो कई दिन पहले इस का लिंक बता दिया था.
चिठ्ठाजगत ने वाकई मेहनत की है. कई नये फीचर्स भी जोड़े हैं. शायद वे इस पर अभी भी काम कर रहे हैं, मतलब हमें और अच्छा देखने को मिल सकता है.
अभी तो और भी एग्रीगेटर देखने बाकी हैं.
अपने चिट्ठे पर आगन्तुक बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि अधिक से अधिक एग्रीगेटर्स पर अपने चिट्ठे को पंजीकृत करा लें । चिट्ठाजगत में कई आकर्षक बाते हैं ।
यह सच में बहुत अच्छा फिड एग्रीगेटर है
हाँ जी सचमुच अच्छा प्रयास है। जरा कुछ दिन और आजमा कर इसकी समीक्षा लिखूँगा।