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अलंग के तट पर अलकायदा?

Posted by संजय तिवारी on Jul 27th, 2007 and filed under बात करामात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

एसएस नार्वे जहाज का नाम आपने भले न सुना हो लेकिन इसी जाहज के छद्म नाम “ब्लू-लेडी” को आपने जरूर सुना होगा. अलंग के बारे में भी जानते होंगे. पुराने जहाजों को तोड़ने की सबसे बड़ी मंडी. गुजरात के फलते-फूलते स्क्रैप उद्योग का आधारस्तंभ. लगभग सालभर से यह जहाज अलंग के इसी तट से दूर लंगर डाले खड़ा है. मामला यह है कि जहाज तोड़ने के नियम-कानूनों को धता बताते हुए यह ब्लू लेडी टूटने को बेताब है. सवाल उठता है कि पुराना जहाज है, टूटने के लिए आया है टूट जाएगा इसमें अन्यथा क्या है?

पहली बात यह कि जहाज अलंग के तट तक धोखाधड़ी के रास्ते पहुंचा है. कहा गया जहाज अपने व्यावसायिक टूर पर है. यह जहाज मलेशिया से रवाना हुआ तो गुजरात के पास पहुंचते ही आपद कारणों से तट के किनारे रूकने की अनुमति मांगने लगा. कहा गया इसमें 12 सदस्यीय भारतीयों का एक दल है और अगर इसे तट पर रूकने की अनुमति नहीं दी गयी तो वे सारे भारतीय भी मारे जाएंगे. अनुमति मिल गयी. फिर इसे तोड़ने की तैयारियां शुरू हो गयीं. क्यों?

क्योंकि यह जहाज 16 मिलियन अमेरिकी डालर में तोड़ने के लिए ही खरीदा गया था और अलंग के तट पर बहाने से लाया गया. अगर इस तरह के बहाने न किये जाते तो अलंग के तट पर इस जहाज को रोकने की अनुमति नहीं मिलती. इसी समय इंडियन प्लेटफार्म आन शिपब्रेकिंग और वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर दी कि यह जहाज अवैध तरीके से भारत के अलंग तट पर लाया गया है और इसपर कई तरह के घातक अपशिष्ट पदार्थ लदे हैं जिसके कारण यहां काम करनेवाले मजदूरों की जिंदगी तबाह हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय वेसल कन्वेंशन के तहत इस तरह का कोई जहाज जब भारत के अलंग लाया जाता है तो उसे पूरी तरह से अपशिष्टमुक्त करना जरूरी होता है. लेकिन अभी तो इस जहाज के साथ हजारों टन गंदगी भी अलंग को लीलने के लिए तैयार बैठा है.

अब, विवादों से घिरे इस जहाज के बारे में जो नये तथ्य सामने आये हैं वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. नये तथ्यों के प्रकाश में यह बात जाहिर हो गयी है कि इस पर रेडियो-एक्टिव पदार्थ मौजूद है. एसएस नार्वे (ब्लू लेडी का पुराना नाम) के एक पूर्व मैनेजर टाम हागन ने खुलासा किया है कि इस जहाज पर अमेरिसियम 241 नामक पदार्थ मौजूद है जो कि रेडियो एक्टिव श्रेणी में गिना जाता है. साथ ही जहाज में 5500 ऐसे संवेदनशील स्थान हैं जहां विस्फोट होने की पूरी संभावना है.

अब यह सवाल गौड़ है कि इस जहाज में रेडियो-एक्टिव पदार्थ हैं या नहीं. सवाल यह है कि असली खेल क्या है और इसके पीछे खिलाड़ी कौन है? नेवल इंटेलिजेन्स की रिपोर्ट जिसकी एक कापी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी है उसमें आशंका जाहिर की गयी है कि इस जहाज को खरीदने के तार कराची के एक अंडरवर्ल्ड सरगना से जुड़े हो सकते हैं. अभी इस पर कोई जांच नहीं हुई थी कि अब एक नया खुलासा यह हुआ है कि 2003 में अलकायदा ने एसएस नार्वे को अपना निशाना बनाया था. इस हमले का जिक्र अलकायदा के टेप में है जो 22 मई 2003 को प्रसारित किया गया था. सवाल है क्या अलकायदा ने जानबूझकर इस जहाज को निशाना बनाया था जिससे यह जल्द ही सेवामुक्त होकर शिपब्रेकिंग यार्ड का रास्ता पकड़ ले. वैसे एक जानकारी आपको रखनी चाहिए कि 52 वर्षीय महिला से शादी कर चर्चा का विषय बने ओसामा बिन लादेन के शहजादे का मूल व्यवसाय स्कैप का कारोबार ही है.

नार्वे निवासी यह सवाल करते रहे कि अलकायदा की नार्वे से क्या दुश्मनी है. (विस्तार से जानना हो तो यहां क्लिक करें.) लेकिन अलकायदा का कहना था ऐसा वह अमरीका के कारपोरेट हित को तबाह करने के लिए कर रहा है. अमरीका का कारपोरेट हित तबाह
करने के लिए या फिर अपना व्यावसायिक हित साधने के लिए अलकायदा ने यह कदम उठाया था? क्या अलकायदा की कमाई का एक जरिया स्क्रैप का कारोबार भी है जिसको चलाने के लिए आतंकवाद का सहारा लिया जाता है. लगता है स्क्रैप के इस कारोबार में कराची के सरगना से लेकर गुजरात के व्यापारी तक शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट में जो वकील इन कारोबारियों की पैरवी कर रहा है उसकी फीस करोड़ों में होती है. और आफ दि रिकार्ड जिनके नाम सामने आ रहे हैं वे राजनीतिक मंच पर विपरीत विचारधारा के लोग हैं, लेकिन इस व्यवसाय में एक दूसरे से हाथ मिलाकर काम कर रहे हैं. तो क्या कोई इतनी बड़ी ताकत इनके पीछे काम कर रही है जिसके कारण राष्ट्रवादी और गैरराष्ट्रवादी ताकतें एक हो गयी हैं?

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6 Responses for “अलंग के तट पर अलकायदा?”

  1. उमाशंकर सिंह says:

    आंखें खोलने वाली जानकारी है। जांच एजेंसियों को गहराई में उतरने की ज़रुरत है। मैं इसकी चर्चा सुप्रीम कोर्ट के मामले देखने वाले अपने सहयोगी के साथ करुंगा।

    शुक्रिया

  2. maithily says:

    संजय जी; आपकी जानकारी वाकई विस्फोटक है!

  3. Sanjeeva Tiwari says:

    आपकी यह जानकारी सचमुच चौंकाने वाली है ।

  4. संजय बेंगाणी says:

    यह तो विस्फोट है भाई.

  5. परमजीत बाली says:

    आप ने बहुत बड़ी जानकारी दी है।सचमुच ऐसी विस्फोटक जानकारीया चौंका जाती है\

  6. Gopal Krishna says:

    Nexus between ship-breaking and the terror elements is known for quite a while and even intelligence agencies have advised the Ministry of Defence (MOD)in this regard. In fact there has been documentary proof to illustrate that MOD clearance for import of ships meant for dismantling be made mandatory. This has not happened despite much hyped anti terror measures.underway..

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