नये चिट्ठों की चर्चा हम अक्सर करते रहते हैं. लेकिन ऐसे चिट्ठों के बारे में बात नहीं करते जो एक दौर में खूब सक्रिय थे लेकिन अब वे इतिहास हो गये है. कम से कम साल भर से जिन चिट्ठों पर कुछ नहीं लिखा गया है, कुछ की सूची यहां दे रहे हैं.
योगब्लाग
शुएब
नून तेल लकड़ी
तत्काल
प्रारंभ
भात-भाजी
जलते हुए मुद्दे
इन चिट्ठों को देखने के बाद लगता है ये उम्दा चिट्ठे थे. अच्छे विषय उठानेवाले, वास्तविक मुद्दों पर बहस चलानेवाले चिट्ठे क्यों टूट जाते हैं इस पर हम सब को सोचना चाहिए. अच्छी बहस चलानेवाले चौखंबा पर भी लगभग महीनेभर से कोई नई पोस्ट नहीं आई है.
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kya khub likha hai. jara in blog valon ko jagane ki kosis kijiye.
यह केवल चिट्ठाकारी ही नहीं हर मामले में है. शुरू-शुरू में जो उत्साह होता है, बाद में नहीं रह जाता. चिंताजनक यह है कि ऐसा अक्सर भले कामों और अच्छी सोच के मामले में ही देखा जाता है. बेहूदगी का परचम लहराने वाले पूरी बेशर्मी के साथ लंबे समय तक मैदां में बने रहते हैं. अच्छे लोग बने रहें इसके लिए जरूरी है कि हम आपस में एक दूसरे का उत्साह बढाते रहें.
उत्साह बहुत जरुरी है…
हौसला अफजाई की जरुरत को कभी नाकारा नहीं जा सकता.
शुएब का नया चिट्ठा निम्न है, वे अपने डोमैन पर चले गए हैं।
http://shuaib.in