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कुछ पुराने चिट्ठे जो अब इतिहास हैं

Posted by संजय तिवारी on Aug 4th, 2007 and filed under बात करामात. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

नये चिट्ठों की चर्चा हम अक्सर करते रहते हैं. लेकिन ऐसे चिट्ठों के बारे में बात नहीं करते जो एक दौर में खूब सक्रिय थे लेकिन अब वे इतिहास हो गये है. कम से कम साल भर से जिन चिट्ठों पर कुछ नहीं लिखा गया है, कुछ की सूची यहां दे रहे हैं.

योगब्लाग
शुएब
नून तेल लकड़ी
तत्काल
प्रारंभ
भात-भाजी
जलते हुए मुद्दे

इन चिट्ठों को देखने के बाद लगता है ये उम्दा चिट्ठे थे. अच्छे विषय उठानेवाले, वास्तविक मुद्दों पर बहस चलानेवाले चिट्ठे क्यों टूट जाते हैं इस पर हम सब को सोचना चाहिए. अच्छी बहस चलानेवाले चौखंबा पर भी लगभग महीनेभर से कोई नई पोस्ट नहीं आई है.

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5 Responses for “कुछ पुराने चिट्ठे जो अब इतिहास हैं”

  1. विनीत उत्पल says:

    kya khub likha hai. jara in blog valon ko jagane ki kosis kijiye.

  2. Isht Deo Sankrityaayan says:

    यह केवल चिट्ठाकारी ही नहीं हर मामले में है. शुरू-शुरू में जो उत्साह होता है, बाद में नहीं रह जाता. चिंताजनक यह है कि ऐसा अक्सर भले कामों और अच्छी सोच के मामले में ही देखा जाता है. बेहूदगी का परचम लहराने वाले पूरी बेशर्मी के साथ लंबे समय तक मैदां में बने रहते हैं. अच्छे लोग बने रहें इसके लिए जरूरी है कि हम आपस में एक दूसरे का उत्साह बढाते रहें.

  3. Divine India says:

    उत्साह बहुत जरुरी है…

  4. Udan Tashtari says:

    हौसला अफजाई की जरुरत को कभी नाकारा नहीं जा सकता.

  5. Shrish says:

    शुएब का नया चिट्ठा निम्न है, वे अपने डोमैन पर चले गए हैं।

    http://shuaib.in

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