भगवान बुद्ध के प्रति हममें से किसकी श्रद्धा नहीं होगी? शांति और अहिंसा के अद्वितीय उपदेशक के प्रति हर व्यक्ति के मन में स्वाभाविक श्रद्धा होनी ही चाहिए. भारतीय लोग तो बुद्ध के प्रति श्रद्धा दिखाते नहीं थकते. नौजवान पीढ़ी तो खासकर बुद्ध को बतौर फैशन बात करती है. लेकिन इसी नौजवान समाज के कुछ लोग रविवार को एक वरिष्ठ नेता के घर मिलने के लिए आये. ये नौजवान भी कोई सामान्य नौजवान नहीं. पुणे की चर्चित एमआईटी के विद्यार्थी जो कि स्कूल आफ गवर्नेन्स की पढ़ाई पढ़ते हैं. अर्थात सीधे शब्दों में कहें तो राजनीति की पाठशाला में शासन प्रशासन चलाने की विद्या सीख रहे हैं.
जिन्हें देश प्रदेश का शासन जिम्मेदारी से चलाना है वे खुद कितने जिम्मेदार हैं? उस नेता के घर कोई 19 छात्र और उनके शिक्षक महोदय आये थे. आदर सत्कार के लिए नेताजी के लोगों ने उन्हें समोसे खिलाए, पानी पिलाया. अब जहां ये छात्र बैठे थे उसके पीछे एक छोटी सी टेबल पर बुद्ध की प्यारी सी मूर्ति रखी थी. खाने पीने के बाद इन छात्रों ने बचा हुआ समोसा और पानी पिये हुए गिलास से बुद्ध की उस छोटी सी मोहक मूर्ति के सामने रख दिया. ऐसा जानबूझकर नहीं किया होगा लेकिन जिन्हें इतना भी होश न हो कि वे क्या कर रहे हैं वे भला गवर्नेन्स की कौन सी पढ़ाई पढ़ाई पढ़ रहे होंगे आप ही अंदाज लगाईये? जो इतने बेहोश हों कि बुद्ध की मूर्ति के सामने जूठे गिलास और बचा हुआ समोसा रख देते हों और उन्हें यह भी होश न रहता हो कि वे क्या कर रहे हैं वे भला देश को कैसे चलाएंगे?
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कुसंस्कार को छिपा पाना बहुत कठिन है।
What liberating knwlogede. Give me liberty or give me death.
संस्कार बता रहे हैं कि देश की प्रगतिदिशा क्या होगी….
यूं भी जिस पटरी पर हम चल रहे हैं, उसके पीछे ऐसे ही दृष्टांत रोज मिलते हैं।
टीवी के पत्रकार इसका आसान उदाहरण हैं।
जिसकी जैसी भावना होगी वह वैसा ही करेगा …
Is tarah ki batein jane me ho ya anjane me hame iska dhyan rakhana chahiye. Wakai ye chintajanak baat hai ki ham itane behosh kyo hote ja rahe hai ki hamein pata hi nahi chalta ki ham kaha ja rahe hai. Unse aisa is karan se hua ki unka dhyan netaji ki or hi tha ya sidhe shabdon me kahe to netaji ki chatukarita me vyast the to dhyan kaha rahega. Chatukarita hame kaha lekar ja rahi hai wah to saaf dikh raha hai. ab bhi samay hai apni virasat ka samman karna sikhana baki hai abhi hamara.