
बचपन से यही सुनता,देखता और अनुभव करता आया हूं कि लड़कियां धान के पौधे की तरह होती है. जिनकी पैदाईश कहीं और होती है रोपाई कहीं और. शायद भारतीय परवरिश में ही ऐसे संस्कार हैं कि लड़की बहुत छोटी उम्र से ही यह अनुभव करना शुरू कर देती है कि उसका स्थाई बसेरा यह नहीं [...]
November 7, 2008 | Posted in
बात करामात |
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यह एक अच्छी खबर है जिसे पीटीआई ने जारी किया है. अच्छी खबर इसलिए कि देर-सबेर उत्तर के लोगों को इस तरह के फैसले तो लेने ही होंगे. किसी दूसरे की जमीन पर जाकर उसको जस्टीफाई नहीं किया जा सकता. एक बार भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री वहां से बाहर जाएगी तो आगे के रास्ते भी आसान [...]
November 4, 2008 | Posted in
बात करामात |
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बहुत सारे मित्रों, परिचितों, शुभचिंतकों और सुहृदजनों के धड़ाधड़ ईमेल, एसएमएस आ रहे हैं. सब दीवाली की बधाई दे रहे हैं. आपको भी आ रहे होंगे, या फिर आप भी लोगों को अपनी शुभकामना भेज ही रहे होंगे.
मुझे बहुत आश्चर्य हो रहा है. जिस देश में राम के अस्तित्व तक को स्वीकार नहीं किया जाता, [...]
October 27, 2008 | Posted in
बात करामात |
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अगर तमिल फिल्म इंडस्ट्री तमिलनाडु में है, तेलगू फिल्म इंडस्ट्री आंध्र प्रदेश में है, बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री बंगाल में है तो हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री एक मराठी राज्य में क्यों है?
यह एसएमएस विमल सिंह ने भेजा है. अच्छा सवाल है, आपकी क्या राय है?
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October 22, 2008 | Posted in
बात करामात |
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यह एक आधुनिक पर्यावरणवादी की आप सबसे अपील है. अगर आप रावण जलाते हैं तो इससे कार्बन उत्सर्जन होगा जो कि पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं होगा. अगर आप चाहते हैं कि आपका पर्यावरण सुरक्षित रहे तो कृपया रावण को मत जलाईये. और रावण ही क्यों? हिन्दू लोग मृतकों का दाह-संस्कार करते हैं. एक आदमी [...]
October 9, 2008 | Posted in
बात करामात |
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