
ब्लाग मीट शब्द को लेकर हिन्दी ब्लागरों ने अक्सर विरोध किया था. आपस की मुलाकात को ब्लाग मीट में तब्दील करनेवाले अनूप शुक्ला ने वास्तव में ब्लागरों को एक दूसरे से मिलने मिलाने का सिलसिला शुरू किया था. वह थोड़ा आगे बढ़ा और भरभराकर गिर गया. लेकिन जो लोग इलाहाबाद में मौजूद हैं वे देख [...]
October 24, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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ब्लागवाणी भी एक प्रयोग ही था. मार्च-अप्रैल 2007 में जब ब्लागवाणी की शुरूआत की गयी थी तो लक्ष्य क्या था? हिन्दी में ब्लाग बढ़ने लगे थे. दिल्ली में सामान्य सा व्यापार करनेवाले मैथिली गुप्त ने सोचा कि हिन्दी के ब्लागों के लिए एक ऐसा एग्रीगेटर होना चाहिए जो बिना लाग लपेट और किसी पूर्वाग्रह के [...]
September 28, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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मातृत्व एक ऐसी सौगात है जो हर जीव योनि को समान सुख देती है. मां का अपने शिशु से रिश्ता उस जीव योनि के स्वभाव से निर्धारित होता है. लेकिन हर जीव योनि में एक बात समान होती है कि मातृत्व के बिना संपूर्णता और संतति दोनों ही बधित हो जाते हैं. इंसान का बुद्धि [...]
September 24, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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घोर कलियुग में अगर कोई गाते-बजाते आपको यह सुनाए तो अचानक ही उस ओर ध्यान जाता ही है. 3.27 मिनट का एक छोटा सा वीडियो बाबा नानक से प्रार्थना कर रहा है कि सबको खुशी देना. जिनके पास घर नहीं है, उन्हें घर देना. जिनके पास खाने को अन्न नहीं है उन्हें अन्न देना. सारी [...]
June 18, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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दुनिया में कितने संजय तिवारी हैं? हजारों में तो होंगे ही. अपने गांव के बगल में ही एक संजय तिवारी हुआ करते थे. सालों से उनसे मुलाकात नहीं हुई. सुना है गांव में ही रहते हैं. उनसे भले ही मुलाकात न हुई हो लेकिन आज ऐसे ही फेशबुक पर संजय तिवारी खोजा तो 93 संजय [...]
June 9, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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