
सोमवार की शाम को दूरदर्शन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा अपनी-अपनी पार्टी के लिए वोट मांगते देखा. यह एक पुरानी परंपरा है जो दूरदर्शन में संभवतः अस्सी के दशक से चली आ रही है. आमचुनाव के वक्त दूरदर्शन सभी राष्ट्रीय दलों को एक निश्चित समय सीमा देता है. इस बार भी ऐसा ही [...]
April 28, 2009 | Posted in
बियाबान में शोर |
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हिन्दी ब्लागरी की शुरूआत कोई पुरानी घटना नहीं है. यह ताजा तरीन बात है. मैं आज कुछ आधुनिक तकनीकों पर काम करता हूं. विस्फोट वेबसाईट मैनेज करता हूं और कुछ ऐसी तकनीकों पर थोड़ी बहुत पकड़ बन गयी है जिसके बारे में आज से साल डेढ़ साल पहले तक सोच भी नहीं सकता था. यह [...]
December 27, 2008 | Posted in
बियाबान में शोर |
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नैनों कार परियोजना को एक राज्य से निकालकर दूसरे राज्य में ले जाने पर गुजराती जिस तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं क्या उससे नहीं लगता कि वे हुर्रियत कांफ्रेस के गुजराती संस्करण है? िजस गुजराती अस्मिता और पहचान को मोदी भुना रहे हैं क्या वह पहचना कश्मीरी अलगाववादियों से कुछ अलग है? बिल्कुल अलग [...]
October 8, 2008 | Posted in
बियाबान में शोर |
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ब्लागरी करते एक साल बीत गया. पिछले साल ऐसी ही गर्मियों के बीच अप्रैल के दूसरे हफ्ते में पहली बार यूनिकोड हिन्दी में लिख सका था. लिखते-मिटाते जो पहली पोस्ट प्रकाशित हुई वह हुई 26 अप्रैल को लेकिन मुझे खूब याद है 16 या फिर 17 अप्रैल को मैंने सबसे पहले यूनिकोड हिन्दी में टाईप [...]
April 16, 2008 | Posted in
बियाबान में शोर |
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