दिल्ली दरबार “पप्पू कान्ट वोट साला”

भारतनामा “शिक्षा चाहिए संस्कार नहीं”

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Archive for the Category ‘भारतनामा’

शिक्षा चाहिए, संस्कार नहीं

शिक्षा चाहिए, संस्कार नहीं

भारतीय मानस पर लंबे आक्रमण का जो सबसे बुरा प्रभाव हुआ है वह यह कि हमारी शिक्षा हमारे संस्कार से अलग हो गयी है. शिक्षा अपने आप में कोई संस्कार नहीं बची है. शिक्षा भी उद्यम है जैसे जीवन के दूसरे सारे उद्यम. फैक्टरी में काम करने के लिए एक फैक्टरी ब्वाय चाहिए. आफिस में [...]

भाषा नहीं नस्ल

भाषा नहीं नस्ल

अंग्रेजों ने भारतीयों का वर्गीकरण इस तरह किया कि वे आर्य होने का दावा भी नहीं कर सके. बताया गया कि आर्य जो मध्य एशिया से होकर भारत आये, अब कुछ ब्राह्मण और क्षत्रिय जातियों के रूप में ही शेष हैं. इसका मतलब यह हुआ कि ब्राह्मणों और क्षत्रियों में भी कुछ ही आर्य हैं. [...]

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