दिल्ली दरबार “पप्पू कान्ट वोट साला”

भारतनामा “शिक्षा चाहिए संस्कार नहीं”

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Archive for the Category ‘हाहाकार’

समलैंगिकता के सवाल पर संघवाले चुप क्यों हैं?

समलैंगिकता के सवाल पर संघवाले चुप क्यों हैं?

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि समलैंगिक होना अपराध नहीं है. उसके इस फैसले के बाद पूरे देश में साफ तौर पर लोग तीन हिस्सों में बंट गये. एक वह जो इसका समर्थन कर रहा है. ऐसे लोगों की तादात बहुत थोड़ी लेकिन शक्तिशाली है. इसलिए सबसे ज्यादा इन्हीं लोगों की आवाज सुनाई दे रही [...]

इस देश में कितने गे हैं?

इस देश में कितने गे हैं?

गे संबंधों को जायज ठहराने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर का नजारा देखने लायक था. घोषित गे एक दूसरे से गले मिल रहे थे. पत्रकार उनको कवर कर रहे थे और ऐसे बहुत सारे वकील कैमरे में अपना चेहरा पहुंचाने के लिए आस पास मंडरा रहे थे. लेकिन यह सब बहुत देर नहीं चला. [...]

हर काम कमाई के लिए नहीं होता

हर काम कमाई के लिए नहीं होता

लोग चर्चा करते हैं कि अगर तकनीकि का विस्तार इसी तरह जारी रहा तो आनेवाले समय में आदमी तकनीकि का गुलाम हो जाएगा. वह समय कब आयेगा पता नहीं लेकिन आज का समय तो यह है ही कि ज्यादातर सभ्य लोग पैसे के गुलाम हो गये हैं. असभ्यों की बात कौन करे. विज्ञान,तकनीकि, उद्योग, जीवन, [...]

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