
आपको कुछ समझ में आया. नहीं न? मुझे भी नहीं आया. लेकिन यह कपोल कल्पना से उपजा शब्दयोग नहीं है. यह हमारे ही ब्लाग दुनिया में पैदा नये सिपाही द्वारा प्रयुक्त दो शब्द हैं. खबर क्या है वाली अपनी पोस्ट पर धनात्मक चिंतन नामक इस ब्लागर ने अपनी टिप्पणी की है. बानगी देखिए ” और [...]
July 31, 2007 | Posted in
बात करामात |
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टीवी हमारे मन पर इतना क्यों हावी है? आखिर टीवीवाले क्या दिखाएं कि हम कहेंगे कि टीवी चैनल अच्छा काम कर रहे हैं? जार्ज फर्नांडीज के एक करीबी ने एक दिन कहा कि जार्ज सर न्यूज चैनल नहीं देखते. मुझे बहुत आश्चर्य हुआ. एनडीए के संयोजक, राष्ट्रीय नेता और न्यूज चैनल नहीं देखते. [...]
July 30, 2007 | Posted in
बात करामात |
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हनीफ की रिहाई से भारत सरकार को भले ही यह प्रमाणपत्र मिल गया हो कि यहां मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं. लेकिन गिरफ्तार होना हनीफ के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है. भास्कर नेटवर्क की एक खबर आयी है कि आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में 25 दिन जेल में रहने के बाद [...]
July 30, 2007 | Posted in
बात करामात |
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एसएस नार्वे जहाज का नाम आपने भले न सुना हो लेकिन इसी जाहज के छद्म नाम “ब्लू-लेडी” को आपने जरूर सुना होगा. अलंग के बारे में भी जानते होंगे. पुराने जहाजों को तोड़ने की सबसे बड़ी मंडी. गुजरात के फलते-फूलते स्क्रैप उद्योग का आधारस्तंभ. लगभग सालभर से यह जहाज अलंग के इसी तट से दूर [...]
July 27, 2007 | Posted in
बात करामात |
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समकाल मे चिट्ठाकारों पर लिखी स्टोरी को काकेश ने जब अपने ब्लाग पर प्रकाशित कर दिया तब वहां कुछ लोगों ने मेरे द्वारा दी गयी जानकारियों को अपर्याप्त और अधूरा बताया जो कि है भी. आप कहेंगे कैसे?
तो इन्हीं जानकारियों में एक जानकारी मैंने यह दी थी कि आलोक कुमार हिन्दी के पहले ब्लागर हैं [...]
July 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
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