
समाज और राज्य की अलग-अलग भूमिका और इन दोनों के आपसी संबंध हमेशा दार्शनिक बहस का मुद्दा रहे हैं. इस विषय पर पश्चिमी चिंतन बहुत सीमित अनुभूतियों और अवधारणाओं पर टिका हुआ दिखता है. पश्चिमी दर्शन के मूल में या तो किसी समाज के किसी दूसरे द्वारा जीत लिये जाने का कोई ऐतिहासिक तथ्य होता [...]
August 31, 2007 | Posted in
बात करामात |
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एक नदी हमारे लिए क्यों जरूरी है? वह मनुष्य और प्रकृति को किस प्रकार समृद्ध बनाती है? इससे पहले कि आप कुछ और सोचें दिल्ली विकास प्राधिकरण की सोच जान लीजिए. एक नदी इसलिए जरूरी है क्योंकि उस पर पुल और फ्लाईओवर बनाये जा सकते हैं. उसके पाटों को पाटकर भूखंडों की नीलामी की जा [...]
August 31, 2007 | Posted in
बात करामात |
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अनिद्रा एक जीवन शैली हैओशोअनिद्रा कोई बीमारी नहीं है। अनिद्रा एक जीवनशैली है। प्रकृति की ओर से मनुष्य को इस प्रकार बनाया गया है कि वह कम से कम आठ घंटे कड़ा श्रम करे। जब तक वह आठ घंटे कड़ा श्रम नहीं करता, तब तक सोने का अधिकार अर्जित नहीं करता और जैसे-जैसे कोई समाज [...]
August 30, 2007 | Posted in
बात करामात |
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आज एक सवाल उठाने की इच्छा हो रही है.समाज और बाजार के द्वद्व में हम किसके साथ खड़े रहना चाहते हैं?टिप्पणी से बेहतर है कि आप अपने ब्लाग पर विस्तार से कुछ लिखिए.
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विस्फोट.कॉम को चाहिए निहंग पत्रकार
August 29, 2007 | Posted in
बात करामात |
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जब आप कंम्प्यूटर खरीदते हैं तब आप क्या केवल कंम्प्यूटर ही खरीदते हैं? जी नहीं. जब आप कम्प्यूटर खरीदते हैं तो आप कैंसर, किडनी फेलियर, फेफड़े की बीमारी, बांझपन का खतरा, याददाश्त की कमी और कुछ जटिल मानसिक बीमारियों को भी खरीदते हैं. जब आप कंम्प्यूटर पर काम करते हैं तो आप केवल कंम्प्यूटर पर [...]
August 29, 2007 | Posted in
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