
आलोक कुमार शुरूआती हिन्दी ब्लागरों में से एक हैं. कुछ लोग उन्हें पहला हिन्दी ब्लागर भी कहते हैं. यहां मैं उनके एक ई-मेल का जिक्र कर रहा हूं जो दो दिन पहले आया था. ई-मेल में वे सवाल करते हैं कि क्या उनके ब्लाग में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक दिखता है जिसके चलते कोई एग्रीगेटर [...]
October 25, 2007 | Posted in
बात करामात |
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क्या`बराबरी´ बहुत गूढ़ शब्द है ? पारिवारिक और सामाजिक जीवन में बराबरी की लालसा ही समस्त संघर्षों का आधार है। बराबरी शब्द का महत्व उनसे पूछिए जो निचली पायदानों पर खड़े हैं। जाति, धर्म, भाषा, अर्थव्यवस्था हर जगह अपने से नीचे की एक श्रेणी है जिसका शीर्ष पर आना मना है। वह निचला पायदान जाति [...]
October 19, 2007 | Posted in
बात करामात |
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आज संजीव भाई ने तीजनबाई पर एक सुंदर लेख अपने ब्लाग पर डाला है. लेख पढ़ते और तीजनबाई के बारे में सोचते हुए न जाने क्यों आँखों से आंसू छलक गये. मन में यह धारणा फिर पक्की हो गयी कि हमारे आसपास आज भी बड़े लोग हैं जो किसी न किसी माध्यम से हमारे कष्टों [...]
October 18, 2007 | Posted in
बात करामात |
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गणपतिमहासचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)
यह सवाल उठाया जाता रहा है कि माओवादी अपनी मांगों के लिए अहिंसक तरीके से आंदोलन क्यों नहीं करते हैं? मैं समझता हूं यह बात शासक वर्ग से पूछना चाहिए कि वे आंदोलनों को शांतिपूर्ण ढंग से क्यों नहीं होने देते हैं? शासक वर्ग से मेरा तात्पर्य बड़े जमींदार, सम्राज्यवादी, बहुराष्ट्रीय [...]
October 17, 2007 | Posted in
बात करामात |
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आंकड़ो से भूख भले न मिटती हो फिर भी आंकड़े महत्वपूर्ण तो होते ही हैं. कई बार ये आंकड़े बुद्धि विलास के साधन हैं तो कई बार आंकड़े हमारे नकली चेहरों को आईना भी दिखाते हैं. आप देख सकते हैं कि सेंसेक्स 19 हजार छू गया है और इस छुअन में कई पूंजीपतियों की पेटियां [...]
October 16, 2007 | Posted in
बात करामात |
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