दिल्ली दरबार “पप्पू कान्ट वोट साला”

भारतनामा “शिक्षा चाहिए संस्कार नहीं”

Viagra online Cialis online Actos online

Archive for ‘October, 2007’

एग्रीगेटर होने का धर्म

एग्रीगेटर होने का धर्म

आलोक कुमार शुरूआती हिन्दी ब्लागरों में से एक हैं. कुछ लोग उन्हें पहला हिन्दी ब्लागर भी कहते हैं. यहां मैं उनके एक ई-मेल का जिक्र कर रहा हूं जो दो दिन पहले आया था. ई-मेल में वे सवाल करते हैं कि क्या उनके ब्लाग में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक दिखता है जिसके चलते कोई एग्रीगेटर [...]

क्या बराबरी बहुत गूढ़ शब्द है?

क्या बराबरी बहुत गूढ़ शब्द है?

क्या`बराबरी´ बहुत गूढ़ शब्द है ? पारिवारिक और सामाजिक जीवन में बराबरी की लालसा ही समस्त संघर्षों का आधार है। बराबरी शब्द का महत्व उनसे पूछिए जो निचली पायदानों पर खड़े हैं। जाति, धर्म, भाषा, अर्थव्यवस्था हर जगह अपने से नीचे की एक श्रेणी है जिसका शीर्ष पर आना मना है। वह निचला पायदान जाति [...]

बड़े लोग हमेशा छोटी बातों की चिंता करते हैं

बड़े लोग हमेशा छोटी बातों की चिंता करते हैं

आज संजीव भाई ने तीजनबाई पर एक सुंदर लेख अपने ब्लाग पर डाला है. लेख पढ़ते और तीजनबाई के बारे में सोचते हुए न जाने क्यों आँखों से आंसू छलक गये. मन में यह धारणा फिर पक्की हो गयी कि हमारे आसपास आज भी बड़े लोग हैं जो किसी न किसी माध्यम से हमारे कष्टों [...]

जब शांतिपूर्ण विरोधों की अनदेखी होती है तब….

जब शांतिपूर्ण विरोधों की अनदेखी होती है तब….

गणपतिमहासचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)
यह सवाल उठाया जाता रहा है कि माओवादी अपनी मांगों के लिए अहिंसक तरीके से आंदोलन क्यों नहीं करते हैं? मैं समझता हूं यह बात शासक वर्ग से पूछना चाहिए कि वे आंदोलनों को शांतिपूर्ण ढंग से क्यों नहीं होने देते हैं? शासक वर्ग से मेरा तात्पर्य बड़े जमींदार, सम्राज्यवादी, बहुराष्ट्रीय [...]

खाली पेट, भरीं पेटियां

खाली पेट, भरीं पेटियां

आंकड़ो से भूख भले न मिटती हो फिर भी आंकड़े महत्वपूर्ण तो होते ही हैं. कई बार ये आंकड़े बुद्धि विलास के साधन हैं तो कई बार आंकड़े हमारे नकली चेहरों को आईना भी दिखाते हैं. आप देख सकते हैं कि सेंसेक्स 19 हजार छू गया है और इस छुअन में कई पूंजीपतियों की पेटियां [...]

Advertisement 250x250 ad code to be displayed on the inner pages