
आपने यावुरू का नाम सुना है? नहीं न. मैंने भी नहीं सुना था. कल इसके बारे में पढ़ा. यह पश्चिम आष्ट्रेलिया में बोली जानेवाली एक भाषा थी जिसे अब केवल एक ही आदमी बोल पाता है. तो आश्चर्य भी हुआ और भय भी लगा. अभी तो खोजकर्ताओं को वह आदमी मिल गया जो यावुरू बोलता [...]
October 15, 2007 | Posted in
बात करामात |
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कल से लगातार यह रिपोर्टिंग देखकर मैं हैरान हूं कि आर के पचौरी को नोबेल पुरस्कार मिला है. जबकि पुरस्कार उस पैनल को मिला है जिसके अध्यक्ष आर के पचौरी हैं. दोनों में बहुत फर्क है.
इंटरनेशनल पैनल आन क्लाईमेट चेंज (Intergovernmental Panel on Climate Change (IPCC) में 2000 वैज्ञानिक काम करते हैं. और 2002 में [...]
October 13, 2007 | Posted in
बात करामात |
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कुछ साल पहले दिल्ली में एक सेमीनार में इस बात का रोना रोया गया था कि भारत में घरेलू पर्यटन संतोषजनक नहीं है। इस रोने का आशय यह है कि भारतीय पर्यटन के लिहाज से टहलते नहीं। जब आप पर्यटन नहीं करते तीर्थाटन करते हैं तो आपका घूमना-फिरना आपके लिए फायदेमंद भले हो लेकिन व्यावसायिक [...]
October 11, 2007 | Posted in
बात करामात |
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पांच सालों में यह कोई सातवीं बार मैं ऋषिकेश गया था. पांच साल पहले पहली बार जब गया था तो रात के एक बजे पहुंचा था. बारिस के दिन थे और मेघ गरज -गरज कर टूट पड़ते थे. भय और सन्नाटे के उस माहौल में ऋषिकेश ने अद्भुद आध्यात्मिक अनुभूति दी थी. सात दिनों तक [...]
October 11, 2007 | Posted in
बात करामात |
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आम जीवन में योग के महत्व पर खूब बातें होती हैं. लेकिन आम आदमी योग को कैसे समझता है इसकी एक झलक मुझे उस बस में मिली जिससे मैं ऋषिकेश जा रहा था. हरिद्वार से एक महिला अपनी बेटी के साथ बस में चढ़ती है. आगे ड्राईवर के पास थोड़ी जगह थी, वहीं बैठ जाती [...]
October 11, 2007 | Posted in
बात करामात |
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