
यह अनूप भार्गव की टिप्पणी है सुबीर संवाद सेवा पर. अनूप बाबू आपने कहा है कि आप पुराने आईआईटीयन रहे हैं. इसलिए यह पढ़कर आपको अच्छा नहीं लगा कि हिन्दी किसी कालेज की बपौती नहीं है. आप तकनीकि शिक्षा और हिन्दी प्रेम को अलग-अलग करके देख रहे हैं. मेरा सवाल भी यही है. क्या तकनीकि [...]
October 6, 2007 | Posted in
बात करामात |
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मैंने क्या लिखा इसका कोई मतलब तब खास नहीं रह जाता जब उसे लोगों ने अपनी सुविधानुसार पढ़ा, और जो बुरा लगा उसे आधार बनाकर बहस चली दी. सबने मिलकर यह साबित किया है मानों मुझे आईआईटी के कवियों का हिन्दी में कविता करना बुरा लगा. ज्ञान जी ने इसे चेतावनी देनेवाली पोस्ट कहा है. [...]
October 5, 2007 | Posted in
बात करामात |
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भूमंडलीकरण, निजीकरण के गरीब दौर में जहां शिक्षा को व्यापार बना दिया गया है और इस व्यापार से मुनाफे के गुल्लक भरे जा रहे हों, वहीं पंजाब में एक ऐसा शिक्षण संस्थान भी है, जहां सेवा, सुमिरन, सहयोग, सादगी, शुचिता, ईमानदारी, सच्ची कीरत, सद्कर्म तथा परोपकार का व्यावहारिक पाठ पढ़ाया जाता है।देश भर की शिक्षा [...]
October 5, 2007 | Posted in
बात करामात |
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हिन्दी भाषा पर अपने पहले लेख के बाद मैंने तय किया था कि इस विषय पर दोबारा नहीं लिखूंगा. लेकिन आज विकास ने अपने ब्लाग पर आईआईटी मुंबई के जिस वाणी ब्लाग का नाम सुझाया है उसे देखने के बाद एक बार फिर हिन्दी के साथ चिपके साहित्य समझ पर लिख रहा हूं.
कभी-कभी लगता [...]
October 4, 2007 | Posted in
बात करामात |
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सीताराम केसरी लंबे समय तक कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे और उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने का मौका भी मिला। केन्द्रीय राजनीति से उनकी विदाई जितनी अपमानजनक थी केन्द्रीय राजनीति में उनका प्रवेश उतना ही सम्मानजनक था। श्रीमती इंदिरा गांधी ने उन्हें बिहार से दिल्ली बुलवाया। कहा आपको हम कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी देना चाहते हैं। तुरंत हां [...]
October 3, 2007 | Posted in
बात करामात |
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