
परम पावन दलाई लामा के चित्रों से सुजज्जित यह विडियो और किसी अलौकिक आवाज में किया गया ऊँ मणि पद्मे हुं गायन विभोर कर देता है.
Possibly Related Posts:
भाजपा नेताओं का मक्काः झंडेवालान
पीने का पानी
फिर अविनाश डाल पर
अभिव्यक्ति की चरम अवस्था
विस्फोट.कॉम को चाहिए निहंग पत्रकार
November 27, 2007 | Posted in
बात करामात |
Read More »

इतिहासकार धर्मपाल (Historian Dharampal) का जन्म जनवरी 1922 में मुजफ्फरनगर (उप्र) के एक संपन्न वैश्य परिवार में हुआ था. बचपन में ही वे महात्मा गांधी के प्रति आकर्षित हो गये, और महात्मा गांधी की सहयोगी मीरा बेन के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया था. ऋषिकेश के पास पशुलोक की स्थापना में वे मीरा [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
Read More »

धर्मपाल
सहज भारतीय, चित्त, मानस व काल को समझने के कई मार्ग है। अठारहवीं सदी के स्वदेशी राज-समाज को समझने का मेरा प्रयास एक मार्ग था। उस मार्ग से मानस तो शायद पकड़ में नहीं आता, पर उस मानस की विभिन्न भौतिक व्याप्तियों की समझ तो बनती है। सहज भारतीय तौर-तरीकों और व्यवस्थाओं का कुछ अनुमान [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
Read More »

धर्मपालगॉंधीजी 9 जनवरी 1915 को अपने दक्षिण अफ्रीका प्रवास से वापस देश लौटे। रास्ते में वे ब्रिटेन में भी रूके थे। उसके बाद, बर्मा और श्रीलंका की बात छोड़ दें तो वे केवल एक बार विदेश गए-1931 की वह यात्रा ब्रिटेन जाने के लिए ही थी। पर भारत से जाते और लौटते हुए वे मिस्र,फ्रांस, [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
Read More »

मैंने अब तक यही पढ़ा था कि ध्वनि और प्रकाश दोनों दो घटनाएं हैं. लेकिन अब अनुभव आता है कि ध्वनि से प्रकाश पैदा नहीं होता, ध्वनि ही प्रकाश है. प्रकाश ध्वनि का परिणाम नहीं है, कारक है. इन दोनों का दो अस्तित्व नहीं है. प्रकाश के मूल में ध्वनि है. आवाज है. शब्द है. [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
Read More »