
मैं जानता हूं कि आर्थिक नीतियों के बारे में मेरी बातों से ज्ञानदत्त पाण्डेय शायद ही कभी सहमत होते हों. उनके अपने तर्क होंगे. उनकी अपनी पढ़ाई लिखाई और उस पढ़ाई का अपना एक परसेप्शन होगा. एक समझ होगी. अपनी उस समझ के साथ वे रहने के लिए स्वतंत्र हैं. लेकिन…..लेकिन…..लेकिन
जब गृहमंत्रालय मान रहा है [...]
March 29, 2008 | Posted in
बात करामात |
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वित्तमंत्री कह रहे हैं कि अब मंहगाई और न बढ़े इसके लिए मैं विकास की रफ्तार धीमी कर दूंगा. गृहमंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि उन इलाकों में विकास रोक दिया जाएगा जहां नक्सलवाद तेजी से फैल रहा है.
आप क्या कहते हैं?
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March 29, 2008 | Posted in
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परसों देर रात राजवीर सिंह की हत्या हो गयी. कल दिन-रात टीवी वाले हल्ला मचाते रहे. हल्ला मचाने में कोई हर्जा भी नहीं था. एनडीटीवी इंडिया से बात करते हुए रिटारर्ड पुलिस अफसर किरण बेदी ने कहा कि जब वे इंटेलिजेंस सेल की प्रमुख बनाई गयीं तो 48 घंटे के अंदर स्पेशल सेल को उनके [...]
March 26, 2008 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
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इतिहासकार धर्मपाल ने कई बार यह बात कही थी कि हमारी सबसे बड़ी बुराई यह है कि हम अपने आप को गाली देते हैं. अपनी जाति व्यवस्था को गाली देते हैं, अपने समाज को गाली देते हैं, अपनी राजनीति को गाली देते हैं और कभी कभी तो अपने लोगों को भी गाली देते हैं. [...]
March 24, 2008 | Posted in
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