
निजी डायरी लेखन से अलग हटकर ब्लाग सार्वजनिक हित का माध्यम बने यह हिन्दी ब्लागिंग की सबसे बड़ी जरूरत है और काम भी. इसके सामाजिक और आर्थिक कारण हैं. आज भारत में अधकचरे भूमंडलीकरण का दौर है. कंपनियां अपना प्रभुत्व स्थापित कर रही हैं और लोगों को बताया जा रहा है कि विकास जैसा कोई [...]
June 19, 2008 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
Read More »

यह हिन्दी ब्लागरी का विस्फोट काल है. कोई साल भर पहले जिस शैशव अवस्था की बात हम लोग करते थे आज सालभर बाद वह शैशव किशोरावस्था में बदल चुका है. किशोरावस्था ही असल में जीवन का भी विस्फोटकाल होता है. यही वह उम्र होती है जब शरीर और मन में सबसे ज्यादा बदलाव होते हैं. [...]
June 19, 2008 | Posted in
बात करामात |
Read More »

{पंचकूला} सारी जिंदगी अपराधों से जूझते रहे एक आईपीएस अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद उसके घर आ कर दिल्ली के कुछ लोगों ने ठग लिया। इस अधिकारी ने थाने में रिपोर्ट तो करा दी है मगर अभी तक पुलिस की नींद खुली नही है। इस बीच इस नायाब गिरोह ने पता नही कितनो को ठग [...]
June 16, 2008 | Posted in Uncategorized |
Read More »

{इलाहाबाद} अगर ट्रकों की तकनीक में उचित सुधार कर दिया जाए तो ड्राईवर की सेक्स अपील कम हो जाती है और उनके द्वारा वेश्यावृत्ति पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। इस खोज की परीक्षा की जा रही है और अगर इसे उचित पाया गया तो भारी वाहन बनाने वाली सारी कंपनियों को इस [...]
June 16, 2008 | Posted in
बात करामात |
Read More »

अंग्रेज जो नहीं कर पाये वह हमारे नेता और नौकरशाह कर रहे हैं. टिहरी में अंग्रेजों द्वारा लाख कोशिशों के बावजूद बांध नहीं बनाया जा सका था. मदन मोहन मालवीय जी के आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि 1916 में एक ऐसा समझौता हुआ जिसके कारण गंगा की अविरल धारा बनी रह सकी. लेकिन हमारे [...]
June 12, 2008 | Posted in Uncategorized |
Read More »