दिल्ली दरबार “पप्पू कान्ट वोट साला”

भारतनामा “शिक्षा चाहिए संस्कार नहीं”

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Archive for ‘August, 2008’

विस्फोट का ‘संघीकरण’ हो चुका है

विस्फोट का ‘संघीकरण’ हो चुका है

यह विस्फोट.कॉम के एक नियमित पाठक की टिप्पणी है. दूसरी बार ऐसा हुआ है कि उसी पाठक ने यह शिकायत की है कि विस्फोट संघियों का नया हथियार है. वैसे तो हर आदमी अपना विचार रखने के लिए स्वतंत्र है और किसी भी हालत में उसे रोका-टोंका नहीं जाना चाहिए. लेकिन अगर वह आपकी विचारधारा [...]

टैग खिड़की हैं उसे दरवाजा मत समझिए

टैग खिड़की हैं उसे दरवाजा मत समझिए

अनिल रघुराज की जायज चिंता पर बहुत सारे नाजायज तर्क हो सकते हैं. फिर भी अनुभव से यही समझ में आता है कि टैग का सबसे बेहतर फायदा तभी मिलता है जब आप कम से कम टैग का इस्तेमाल करते हैं और एक ही टैग को बार-बार अपनी पोस्टों में प्रयोग करते हैं. लेकिन जनता [...]

सबकुछ समाहित

सबकुछ समाहित

हम भारतीयों के मन में छोड़ने की मानसिकता बड़ी प्रबल होती है. हम सब जन्म से मृत्यु के बीच लगातार यह सीखते हैं कि आखिरकार सब कुछ छोड़ना है. हमारे आपके बीच में कल ऐसा कौन था जो आज नहीं है और आज जो लोग हैं उनमें से कल कितने लोग रहेंगे? आस पास की [...]

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