
ब्लागरों के लिए बड़े दिनों बाद एक नया एग्रीगेटर आया है. पिछले साल ब्लागवाणी और चिट्ठाजगत बनने के बाद बात शांत हो गयी थी. जितनी तेजी से ब्लाग बढ़े एग्रीगेटर नहीं बढ़े. शायद जरूरत भी नहीं थी. क्योंकि एक अगर ठीक से काम करे तो नियमित लिखनेवाले ब्लागरों के लिए वह ज्यादा सुविधाजनक होता है. [...]
September 26, 2008 | Posted in
टेक्नालाजी के तीर |
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अभी भारत में एप्पल गिने-चुने लोगों द्वारा ही प्रयोग किया जा रहा है और जो लोग प्रयोग कर रहे हैं उनका हिन्दी से शायद दूर-दूर का नाता न हो. लेकिन मैक आपरेटिंग सिस्टम में हिन्दी का सपोर्ट बहुत अच्छा है. केवल हिन्दी ही नहीं बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली और गुरूमुखी गुजराती में बहुत मजे से [...]
September 25, 2008 | Posted in
टेक्नालाजी के तीर |
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रात सिर्फ सोने के लिए नहीं होती. आप प्रेमी हैं तो रात विरह और तड़प के लिए भी होती है. और कोई न मिले तो चांद पर कविताएं करिए और प्रेमी होना सार्थक करिए. आप चौकीदार हैं तो जागकर डंडा फटकारिए. आप बीमार हैं तो खांसिए और अपने आपको कोंसते हुए सूर्य देवता के जल्दी [...]
September 25, 2008 | Posted in
बात करामात |
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इसे आप हिन्दी का दुर्भाग्य भी कह सकते हैं कि स्पैम का दूसरा प्रकार विकसित हो रहा है. यह दूसरा प्रकार वैसा नहीं है जिसके लिए तकनीकि दक्षता की जरूरत पड़ती हो. यह विशुद्ध हिन्दी शैली का और भारतीय स्पैम है. और मजे की बात तो यह है कि ऐसे स्पैमर हमारे आपके बीच के [...]
September 24, 2008 | Posted in
बात करामात |
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मौत जीवन का शास्वत सत्य है. यह बात आपने भी हजार बार सुनी होगी और हमने भी. ऐसा भी नहीं है कि हम मौत के प्रति बहुत उदासीन हैं. रोज-ब-रोज हम अपने आस पास कम होते लोगों को देख रहे हैं. कल जिससे मिले, बातें हुई आगे की योजनाएं बनी आज उनमें से कोई नहीं [...]
September 16, 2008 | Posted in
बात करामात |
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