
ये तीन अलग-अलग शब्द हैं. तीनों का आपस में कोई सामंजस्य नहीं है, लेकिन मेरा ब्लाग बता रहा है कि यही तीन शब्द हैं जिनको खोजते हुए सबसे ज्यादा लोग यहां तक पहुंचे हैं. हिन्दी भाषा लोग खोज रहे हैं, अच्छा लगता है. और खुशी भी होती है कि लोग हिन्दी भाषा खोज रहे हैं [...]
October 7, 2008 | Posted in
बात करामात |
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रात का खाना खाने के बाद कुछ लोग टहलने के लिए निकलते हैं. मैं पान खाने जाता हूं. वर्षों पुरानी आदत है. बनी हुई है. रास्ता पार्क के बगल से जाता है. रोज आना जाना होता है. वहां से गुजरते हुए एक खास जगह पर कुछ खास तरह की महक आती है. जहां तक वह [...]
October 4, 2008 | Posted in
बात करामात |
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यहां अंग्रेजी बोलकर किसके सामने विद्वान होने का रौब झाड़ें? बड़ी मुश्किल है. यहां तो सारे लोग अंग्रेजी बोलते हैं. नौकर से लेकर मालिक तक. अब भारत हो तो अंग्रेजी बोलकर किसी को भी प्रभावित किया जा सकता है. लोग कहेंगे कि वाह, बड़ा पढ़ा लिखा आदमी है. एजुकेटेड है. अगर एजूकेटेड होने की यही [...]
October 4, 2008 | Posted in
बात करामात |
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