दिल्ली दरबार “पप्पू कान्ट वोट साला”

भारतनामा “शिक्षा चाहिए संस्कार नहीं”

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Archive for ‘December, 2008’

मुक्त का मतलब मुफ्त नहीं होता

मुक्त का मतलब मुफ्त नहीं होता

हिन्दी ब्लागरी की शुरूआत कोई पुरानी घटना नहीं है. यह ताजा तरीन बात है. मैं आज कुछ आधुनिक तकनीकों पर काम करता हूं. विस्फोट वेबसाईट मैनेज करता हूं और कुछ ऐसी तकनीकों पर थोड़ी बहुत पकड़ बन गयी है जिसके बारे में आज से साल डेढ़ साल पहले तक सोच भी नहीं सकता था. यह [...]

मैं तो कुछ नहीं बोलूंगा

मैं तो कुछ नहीं बोलूंगा

एन्ड्रू और जो कह रहे हैं कि खुशी सस्टेनबल होनी चाहिए. कैसे? अपने आस-पास उपजा अन्न खाओ. बड़ी खुशी मिलती है. फासिल फ्यूल (पेट्रोल आदि) के कारण ऐसी सुविधा मिल गयी है कि आदमी अपने आस-पास का अन्न खाना भूल ही गया है.  The fact that fast food and ready meals have gone up in [...]

वर्डप्रेस 2.7

वर्डप्रेस 2.7

बहुप्रतीक्षित वर्डप्रेस 2.7 आम उपभोक्ताओं के लिए जारी हो गया है.  आम उपभोक्ता से मतलब जो लोग वर्डप्रेस की स्क्रिप्ट अपने निजी डोमेन पर प्रयोग करते हैं. जो उपभोक्ता वर्डप्रेस.कॉम पर अपना ब्लाग लिख रहे हैं उनके लिए 4 दिसंबर को ही वर्डप्रेस का नया संस्करण उपलब्ध हो गया था.
वर्डप्रेस.कॉम का ब्लाग इस्तेमाल करनेवालों के [...]

राजनीति को गाली इस देश का पुराना फैशन है

राजनीति को गाली इस देश का पुराना फैशन है

राजनीति को गाली देना एक फैशन है. पढ़े लिखे और समझदार होने की निशानी है. ठीक वैसे ही जैसे आप बात करते करते एक दो शब्द अंग्रेजी के बोल दें तो तुरंत प्रतिक्रिया आती है कि अरे आप तो पढ़े लिखे आदमी हैं. ऐसे ही अगर आप राजनीतिज्ञ को गाली देते हैं तो समझा जाता [...]

लिपस्टिक लगाकर आतंक से मुकाबला

लिपस्टिक लगाकर आतंक से मुकाबला

मुंबई में आतंकी हमले के बाद कारपोरेट मीडिया अपने आकाओं (कंपनियों और उसके चट्टुओं) के लिए मीडिया से अधिक आंदोलनकारी की भूमिका में आ गया है. इलेक्ट्रानिक मीडिया एक दो फाईवस्टार होटलों में हुए हमलों को जिस तरह से जंग पर उतारू है वह निश्चित रूप से परेशान करनेवाला है. इलेक्ट्रानिक मीडिया जो भूमिका निभा [...]

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