
आज मैं जब यहां खड़े होकर पीछे देखता हूं तो लगता है कि चार दशक पहले हम किस तरह सूचना के बैलगाड़ी युग में जी रहे थे. भारी भरकम कम्प्यूटर और लैपटाप को हम उन दिनों सूचना तकनीकि का औजार घोषित कर उसका महिमामंडन किया जाता था. महिमामंडन करने में कोई बुराई नहीं थी क्योंकि [...]
July 22, 2009 | Posted in
दुनिया मेरे आगे |
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खबर देने का व्यावसायिक कार्य अब विधिवत उद्योग की शक्ल अख्तियार कर चुका है. पिछले साल प्राइस वाटरहाउस कूपर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि मीडिया उद्योग 2012 तक एक लाख करोड़ की इंडस्ट्री हो जाएगा. इस उद्योग में फिल्म से लेकर समाचार परोसने तक सबकुछ शामिल होगा. अब यह कहना मुश्किल है कि [...]
July 20, 2009 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
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दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि समलैंगिक होना अपराध नहीं है. उसके इस फैसले के बाद पूरे देश में साफ तौर पर लोग तीन हिस्सों में बंट गये. एक वह जो इसका समर्थन कर रहा है. ऐसे लोगों की तादात बहुत थोड़ी लेकिन शक्तिशाली है. इसलिए सबसे ज्यादा इन्हीं लोगों की आवाज सुनाई दे रही [...]
July 7, 2009 | Posted in
हाहाकार |
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गे संबंधों को जायज ठहराने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर का नजारा देखने लायक था. घोषित गे एक दूसरे से गले मिल रहे थे. पत्रकार उनको कवर कर रहे थे और ऐसे बहुत सारे वकील कैमरे में अपना चेहरा पहुंचाने के लिए आस पास मंडरा रहे थे. लेकिन यह सब बहुत देर नहीं चला. [...]
July 3, 2009 | Posted in
हाहाकार |
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