
हमारे बिजनेस अखबार आयातित बुद्धि के प्रभाव में कंपनियों को रिपोर्ट करते समय निवेश पत्रकारिता का रूख अपनाते हैं. अखबारों और चैनलों में बिजनेस रिपोर्टिंग में हर रोज ऐसी खबरें होती हैं कि यह कंपनी यहां इतना निवेश करेगी. वह कंपनी वहां उतना निवेश करेगी. लेकिन कभी आपने यह भी सुना कि उस निवेश की [...]
April 21, 2008 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
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उग्रवाद के दो प्रकार हैं. आजकल हम जिसे उग्रवाद समझ रहे हैं वह प्रतिक्रिया में पैदा हुआ है. लेकिन असली उग्रवाद वह है जो प्रतिक्रिया के लिए प्रेरित करता है. इस उग्रवाद को पिछले 200-300 सालों से व्यापार कहा जाने लगा है. आजकल पूरे भूमंडल पर इसी उग्रवाद का बोलबाला है.
इन ग्रोथ उग्रवादियों का अपना [...]
April 20, 2008 | Posted in
बात करामात |
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मैं नहीं जानता यह कौन सज्जन हैं जिन्होंने मेरे पिछले पोस्ट पर ऐतराज जाहिर किया है और कहा है कि “It is really unfortunate to see that you are accusing IIT and IIMs. which on India feels proud.” वे मेरा ब्लाग पढ़ते हैं और मेरा ऐसा कहना उन्हें बुरा लगा है लेकिन अब मैं जो [...]
January 13, 2008 | Posted in
बात करामात |
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मैं अक्सर कंपनियों के खिलाफ लिखता और बोलता हूं. यह कोई भावावेग नहीं है, मैं पिछले दस सालों से कंपनियों के काम-काज के तरीकों को ही जानने समझने में लगा हूं. और जितना मैं इसको जानता गया मुझे लगने लगा कि भारत नयी तरह की मानसिक गुलामी का शिकार होता जा रहा है. यह नयी [...]
January 12, 2008 | Posted in
बात करामात |
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सालभर पहले की बात है. कोलगेट-पामोलिव कंपनी के आला अधिकारी तमिलनाडु के एक गांव का दौरा करने गये थे. यह उस सर्वेक्षण का हिस्सा था जिसमें इस बात की जांच चल रही थी कि कंपनी के कोलगेट ब्राण्ड का देश में कितना प्रभाव हुआ है. गांव में कई बुजुर्गों के दांतों की जांच की गयी. [...]
December 18, 2007 | Posted in
बात करामात |
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