
मैं इन खबरों से बहुत उत्साहित हूं कि तीन बड़े अखबार व्यावसायिक हिन्दी पत्रकारिता में पदार्पण कर रहे हैं. इकोनॉमिक टाईम्स का हिन्दी संस्करण, बिजनेस स्टैण्डर्ड का हिन्दी संस्करण और दैनिक जागरण सीएनबीसी समूह का हिन्दी अखबार. जबसे ये खबरें आ रही हैं उत्साहित भी हूं और उन बातों को सच होते देख रहा हूं [...]
January 20, 2008 | Posted in
कारपोरेट मीडिया |
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अगस्त में उत्तर प्रदेश में रिलायंस फ्रेश के खिलाफ बड़ा बवाल हुआ था. उसके बाद कंपनी को उत्तर प्रदेश छोड़ने का फैसला करना पड़ा. घोषित तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है लेकिन कंपनी ने फैसला कर लिया है कि अगले महीने यानी जनवरी 2008 में वह उत्तर प्रदेश से पूरी तरह बाहर [...]
December 27, 2007 | Posted in
बात करामात |
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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी पत्रिका को चिट्ठी लिखें और उस चिट्ठी को पढ़कर लोग आपको चिट्ठी लिखे? आठ-नौ सालों से अन्य कामों के साथ-साथ थोड़ा लिखता-पढ़ता भी हूं. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि मेरे लेख नहीं बल्कि मेरे पत्र को पढ़कर किसी ने मुझे पत्र लिखा है. [...]
November 24, 2007 | Posted in
बात करामात |
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दिल्ली से चलनेवाले एक निजी चैनल “टोटल टीवी” की एक महिला पत्रकार ने 18 सितंबर को आत्महत्या कर ली. उस महिला रिपोर्टर का नाम था- प्रिया सिंह. खबर आयी और तरह-तरह से आयी. किसी अखबार ने लिखा कि उसका शारीरिक और मानसिक शोषण होता था जिससे आजिज आकर उसने आत्महत्या कर ली. किसी ने [...]
September 25, 2007 | Posted in
बात करामात |
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आज मिड-डे के दो पत्रकारों, एक कार्टूनिस्ट और मिड डे के प्रकाशक को दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार-चार महीने की सजा सुनाई. हालांकि 10-10 हजार के निजी मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया गया और अब वे 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे, फिर भी सवाल उठता है कि क्या न्यायपालिका पवित्र गाय [...]
September 21, 2007 | Posted in
बात करामात |
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