
यह विस्फोट.कॉम के एक नियमित पाठक की टिप्पणी है. दूसरी बार ऐसा हुआ है कि उसी पाठक ने यह शिकायत की है कि विस्फोट संघियों का नया हथियार है. वैसे तो हर आदमी अपना विचार रखने के लिए स्वतंत्र है और किसी भी हालत में उसे रोका-टोंका नहीं जाना चाहिए. लेकिन अगर वह आपकी विचारधारा [...]
August 27, 2008 | Posted in
बात करामात |
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योगवशिष्ठ मेरा प्रिय ग्रंथ है. वैसे ही जैसे रामचरित मानस, कबीर के दोहे या फिर सुखमनी साहिब. श्रीमद्भगवगीता बहुत बौद्धिक ग्रंन्थ है. मैं पढ़ता जरूर हूं लेकिन उस अपनेपन के साथ नहीं जैसे रामचरितमानस या फिर सुखमनी साहिब को. श्रीमद्भगवतगीता में बुद्धि विलास और तार्किक विश्लेषण ज्यादा है. गीता में भाव का सिरे से [...]
April 26, 2008 | Posted in
दुनिया मेरे आगे |
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दिल्ली का एक नामी पब्लिक स्कूल. वीवीआईपी और पैसेवालों धन्नासेठों की औलादें यहां पढ़ती हैं. स्कूल की अघोषित नियमावली है किसी बच्चे को अनुशासन में नहीं रखना है. वे जो करना चाहें करने के लिए स्वतंत्र हैं. यहां अध्यापक और प्रिंसिपल नौकरों की तरह होते हैं जो पैसे लेकर उन बच्चों की सेवा-टहल करते हैं. [...]
April 11, 2008 | Posted in
बात करामात |
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विद्वान होने के लिए बहुत सारे लोग 33 करोड़ देवी-देवता को मिथक साबित करके भारत और भारतीयता का मजाक उड़ाते हैं. लेकिन शायद ही किसी विद्वान ने इसके बारे में समझने की कोशिश की हो कि समाज में ऐसे प्रतीक आखिर गढ़े क्यों जाते हैं? आखिर वह कौन सी समझ है जो समाज को शासन [...]
April 10, 2008 | Posted in
दुनिया मेरे आगे |
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अफलातून जी ने मेरी पिछली पोस्ट पर लिखा है- मूल्य पर भी दर्शन दें. तो मुझे लगा कि मैंने जो कुछ लिखा वह दर्शन तो नहीं था. फिर लगा कि दर्शन की अवस्था तक पहुंचने की विधि पर क्यों न कुछ लिखा जाए. जो कुछ मेरी समझ है वह बोलता हूं.
सक्रियता के तीन तल होते [...]
April 8, 2008 | Posted in
बात करामात |
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