
समदोंग रिनपोछे (निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री) श्री धर्मपाल जी की स्मृति में हम सब यहां इकट्ठा हुए हैं. सबसे पहले तो मैं उनकी स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित करना चाहता हूं. जिन्होंने मुझे यहां आने का अवसर दिया उन सबका मैं आभार व्यक्त करता हूं. मेरे पास ऐसा कोई विषय नहीं है जो धर्मपाल जी [...]
December 3, 2007 | Posted in
बात करामात |
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धर्मपाल
हमारे पैरों के नीचे अपनी कोई जमीन नहीं है। अपने चित्त व काल का अपना कोई चित्र नहीं है। अपनी कोई विश्वदुष्टि नहीं है। इसलिए ठीक-ठाक चलने वाले समाजों के लोग जो बातें सहज ही जान जाते हैं, वही बातें हमें भूल-भूलैया में डाले रखती हैं। राज, समाज व व्यक्ति के आपसी संबंध क्या होते [...]
November 29, 2007 | Posted in
बात करामात |
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इतिहासकार धर्मपाल (Historian Dharampal) का जन्म जनवरी 1922 में मुजफ्फरनगर (उप्र) के एक संपन्न वैश्य परिवार में हुआ था. बचपन में ही वे महात्मा गांधी के प्रति आकर्षित हो गये, और महात्मा गांधी की सहयोगी मीरा बेन के साथ उन्होंने लंबे समय तक काम किया था. ऋषिकेश के पास पशुलोक की स्थापना में वे मीरा [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
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धर्मपाल
सहज भारतीय, चित्त, मानस व काल को समझने के कई मार्ग है। अठारहवीं सदी के स्वदेशी राज-समाज को समझने का मेरा प्रयास एक मार्ग था। उस मार्ग से मानस तो शायद पकड़ में नहीं आता, पर उस मानस की विभिन्न भौतिक व्याप्तियों की समझ तो बनती है। सहज भारतीय तौर-तरीकों और व्यवस्थाओं का कुछ अनुमान [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
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धर्मपालगॉंधीजी 9 जनवरी 1915 को अपने दक्षिण अफ्रीका प्रवास से वापस देश लौटे। रास्ते में वे ब्रिटेन में भी रूके थे। उसके बाद, बर्मा और श्रीलंका की बात छोड़ दें तो वे केवल एक बार विदेश गए-1931 की वह यात्रा ब्रिटेन जाने के लिए ही थी। पर भारत से जाते और लौटते हुए वे मिस्र,फ्रांस, [...]
November 26, 2007 | Posted in
बात करामात |
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